Page 4 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक…………..
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प्राक्कथन
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"खट्ट मीठ अनुभव शमलत जीवन है शाला सीख की,
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हर जीवन है एक कथा संघर्ों की और जीत की"
डॉ. अनार शसंह ठाकुर की आत्मकथा "आनंद स अनार तक का सफर"
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कवल घटनाओं का क्रम नहीं, बशकक एक ऐस जीवट मनुष्य की जीवन-गाथा है,
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शजसने अभावों की शमट्टी में अपने सपनों का बीज बोया और पररश्रम क जल से
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उसे सींचकर सफलता का वटवृक्ष खडा शकया।
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छोट स गााँव बरदु स शवश्व पटल पर अपनी छाप छोडने तक का संघर् ष
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एवं सफलता का अनुक्रम इस पुस्तक म पाठकों को रोमांशचत करगा।
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यह आत्मकथा कवल एक व्यशि क जीवन का वृत्ांत नहीं, बशकक उन
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अनशगनत सपनों, संघर्ों और संककपों का दस्तावज है, जो एक सामान्य ग्रामीण
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पररवेश स उठकर अपने लक्ष्य तक पह ाँचने की कहानी कहती है। इसम बचपन
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की मासूशमयत है, युवावस्था क संघर् हैं, और जीवन क कशठन मोडों पर शलए
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गए साहशसक शनणषयों की झलक है।
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यह आत्मकथा हम यह संदेश देती है शक पररशस्थशतयााँ चाहे शकतनी ही
प्रशतकूल क्यों न हों, यशद मन में शवश्वास और कम म शनरंतरता हो, तो हर कशठनाई
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को परास्त शकया जा सकता है।
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डॉ. ठाकुर ने अपने जीवन क प्रत्येक उतार-चढाव को अत्यंत सरल,
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सहज और सजीव भार्ा म प्रस्तुत शकया है। यह पुस्तक पाठक को यह शवश्वास
शदलाती है शक यशद दृढ शनश्चय, पररश्रम और सकारात्मक सोच हो, तो कोई भी
व्यशि अपनी पररशस्थशतयों से ऊपर उठकर अपने जीवन को साथषक बना सकता
है।

