Page 6 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक…………..
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संस्मरण
मैं बह त ही गौरवाशन्वत ह ाँ शक श्री अनार शसंह जी ठाक ु र सर की आत्मकथा
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में मुझ भी उनक शलए क ु छ पंशिया शलखन का शुभ अवसर प्राप्त ह आ । मैंन उनकी
प्रशंसा उनक कई शशक्षकों स सुन रखी थी, शकन्तु उनस पररचय तब ह आ, जब
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उत्कृष्ट शवद्यालय टोंकखुदष में 15 अगस्त स्वतंत्रता शदवस का आयोजन का
संचालक कर रहे थे . 16 अगस्त 2019 को इन्होंने हमार शासकीय कन्या उच्चतर
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माध्यशमक शवद्यालय में उपशस्थशत दी । तब हमारा शवद्यालय शवशभन्न प्रकार की
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शक्षशणक समस्याओं स जूझ रहा था और पूर संक ु ल कायालय में आपसी शवश्वास
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की अत्यंत कमी थी । अशस्थरता का वातावरण था, शजसमें हम सभी शशक्षक एवं
शशशक्षकाएं स्वयं को बह त असुरशक्षत तथा असहज शस्थशत में पाते थे। शकन्तु ठाक ु र
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जी न हमारी मनःशस्थशत तथा असुरशक्षत वातावरण क कारणों को समझा और हम
सभी को शनराशाजनक शस्थशत से बाहर शनकाला। आज हमारा शवद्यालय शजस
प्रशतशित और सम्मानजनक है,उसका एकमात्र कारण श्री अनार शसंह जी ठाक ु र हैं ।
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पररवतन और मागदशषन
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पहल न तो हमारी छात्राएं अध्ययन में रुशच लती थीं, न ही उनक जीवन
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का कोई लक्ष्य था । शशक्षकगण भी अपन कतषव्य क प्रशत पूण समशपत नहीं थे और
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कवल माशसक वतन प्राप्त करना ही हम सबक जीवन का उद्देश्य था । ठाक ु र जी क
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साशनध्य में रहकर हम सभी में ऊजा का संचार ह आ । ठाक ु र जी की जीवनशली,
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काय करन क तरीक तथा शमत्रवत् व्यवहार का हम सभी पर सकारात्मक प्रभाव
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पडा । 2021 तक सम्पूण शवद्यालय एक नए स्तर पर पह ाँच गया, शजसका सपना
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ठाक ु र सर न हमें शदखाया था । उन्होंन छात्राओं को नई तकनीक शसखाई ।
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अतः संक ु ल क प्रत्यक भाग को शनखारन में उनकी सशक्रय भूशमका रही ।
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शवद्यालय की शवत्ीय शस्थशत को संभालन में उन्होंन हमारा पूण सहयोग शकया ।

