Page 7 - आनंद से अनार तक
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                           आत्मकथा -आनंद स अनार तक…………..

              शासन द्वारा प्रदान शकए गए अनुदान एवं राशश का शवद्यालय में सदुपयोग करना

                                                                 े
              शसखाया । श्री ठाक ु र जी का सरल और शमतभार्ी व्यवहार क्षेत्र क छात्र-छात्राओं
              तथा शशक्षक समाज को सदैव आकशर्षत करता है ।

                             सामाशजक योगदान और व्यशिगत प्रभाव
                     वे शनधषन छात्र-छात्राओं की समय-समय पर अध्ययन में सहायता करते हैं
              । बह त स नवीन शशक्षक-शशशक्षकाएं सर क साशनध्य एवं मागषदशन में ही शासकीय
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              सवा क योग्य बन सक हैं । ठाक ु र सर न न जान शकतनों का जीवन संवार शदया है ।
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              ऐस दानी तथा सज्जन संसार में शवरल ही होते हैं जो अपनी प्रशंसा स्वयं नहीं करते
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              । उनक द्वारा शकए गए सद्काय ही उनकी प्रशसशधॎध एवं सम्मान को बढाते हैं ।
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                     श्री अनार शसंह जी ठाक ु र सर को शशक्षा क क्षेत्र में कई राष्रीय एवं राज्य
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              स्तरीय पुरस्कार प्राप्त हो चुक हैं । टोंकखुदष में क ं प्यूटर शशक्षा लान का श्रेय कवल
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              उन्हीं को जाता है । इनका मेर शनजी जीवन पर भी अत्यशधक प्रभाव है । एक समय
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              जब मुझमें आत्मशवश्वास की कमी हो गई थी और मैं स्वयं क जीवन स शनराश थी,
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              तब ठाक ु र जी सर न मुझ जीवन का महत्व समझाया । आज अगर मेरा सम्मान
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              शकया जाता है, तो उसका प्रमुख कारण श्री ठाक ु र जी हैं, शजनक प्रेरक शवचारों,
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              मागषदशन एवं संरक्षण क कारण मैं अपन पररवार क साथ प्रसन्नशचत् जीवन व्यतीत
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              कर रही ह ाँ ।
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                     अंत में मुझ इतना ही कहना है शक श्री अनार शसंह जी ठाक ु र सर हम सभी
              क्षेत्रवाशसयों क शलए एक ऐस वटवृक्ष हैं, शजनकी घनी छााँव में हम सभी शशक्षकगण
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              और छात्र सफलता प्राप्त कर रहे हैं और अपने जीवन को धन्य मानते हैं ।  इशत
                                               -अशम्बका सोमानी
                                                  प्रभारी प्राचायष
                           (शासकीय कन्या उच्चतर माध्यशमक शवद्यालय टोंकखुदष )
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