Page 5 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक…………..
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डॉ. ठाक ु र का व्यशित्व एक साशहत्यकार का नही होने पर भी इस
पुस्तक में इनकी भार्ा शैली व कहन बह त ही रोचक है जो पाठकों को बााँधकर
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रखता है। इन्होंने अपनी बातें ,अपने अनुभवों व अपने भावों को अपनी स्मृशत क
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आधार पर शबना शकसी लाग लपेट क सच्चाई क साथ पाठकों क समक्ष रखा हैं।
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एक कशव होने क नात म यह कह सकता ह ाँ शक यह आत्मकथा कवल
गद्य नहीं, बशकक जीवन क भावों की एक सजीव कशवता है।
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मुझ पूण शवश्वास है शक "आनंद स अनार तक का सफर" हर पाठक क
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हृदय में प्रेरणा का दीप प्रज्वशलत करगी और उसे अपने जीवन-पथ पर आगे
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बढने की नई ऊजाष प्रदान करगी।
मैं शनजी तौर पर डॉ अनारशसंह ठाक ु र क समय प्रबंधन ,संस्थान प्रबंधन,
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टाइम पंक्चुशलटी और जीवन प्रबंधन का शुऱू स कायल रहा ह ाँ।
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डॉ अनारशसंह ठाक ु र स मेरी अनन्य शमत्रता मेर जीवन की अमूकय कमाई
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है,और इस पुस्तक का प्राक्कथन/भूशमका शलखना मेर शलए गवष का क्षण!
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मुझ पूण शवश्वास है शक यह पुस्तक न कवल युवाओं क शलए, बशकक
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प्रत्येक पाठक क शलए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और उन्हें अपने जीवन में आगे
बढने की नई ऊजाष प्रदान करगी।
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डॉ. अनार शसंह ठाक ु र जी को इस उत्कृष्ट कृशत क शलए हाशदषक
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शुभकामनाएाँ। उनकी यह जीवन-यात्रा अनेक लोगों क शलए मागषदशषक शसधॎध
होगी—इसी आशा क साथ।
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शुभच्छु -सुरन्र सन्धव
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(कशव, गीतकार ) सेकली,देवास (मप्र)

