Page 243 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                     यह मववाह कवल दो व्यमियों का ममलन नहीं था, बमल्क दो पररवारों
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              और संस्कृमतयों का ममलन था। पूर टोंकखुदष ने उस जश्न को देखा, जहााँ बैंड-
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              बाजों की गूज म हमार पररवार की एकजुटता सार्फ झलक रही थी। जब अंजली
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              की मवदाई का क्षण आया, तो मरी आख भर आई ं । मुझ लगा जस अभी कल ही
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              की बात थी जब वह आाँगन में खेलती थी, और आज वह एक नए घर की लक्ष्मी
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              बनने जा रही थी। सुमर और पूर पररवार ने मजस भव्यता और प्रेम स इस आयोजन
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              को पूण मकया, वह हमारी पाररवाररक प्रमतष्ठा म एक और स्वमणम पृष्ठ जोड गया।
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               संस्थानों का मवस्तार: मशक्षा का महायज्ञ
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                     मर  िारा  स्थामपत  संस्थान—मशवम  ब्रेनी  बयर  स्क ू ल,  भारत  हायर
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              सकडरी स्क ू ल और मशवम इंस्टीट्यूट—आज टोंकखुदष की धडकन बन चुक हैं
              । 'बचपन से पचपन तक' की मशक्षा एक ही छत क नीचे देने का जो सपना हमने
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              देखा था, वह आज हज़ारों युवाओं क रोज़गार का आधार बन गया है। जब कोई
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              पूव छात्र आकर बताता है मक वह आज मकसी उच्च सरकारी पद पर आसीन है,
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              तो मुझ अपनी रातों की नींद और संघर् साथषक लगने लगत हैं ।
               अभी यात्रा शेर् है
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                     डॉ. अनार मसंह ठाकुर क ऱूप म आज मर पास सम्मान है, उपलमब्धयााँ
                                                     े
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              हैं और एक भरा-पूरा सुखी पररवार है। लेमकन एक 'जल चैंमपयन' और एक
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              'मशक्षक' क ऱूप म मरा मन अभी भी अतृप्त है । समाज में व्याप्त अमशक्षा, जल
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              संकट और मगरत हुए मूल्यों क मखलाफ मरी कलम और मरा कम मनरंतर जारी
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              रहेगा।
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              मेरी माताजी, श्रीमती कशर बाई ठाकुर, की वह सीख हमशा मर कानों म गूजती
              है— "बेटा, मेहनत कभी मनष्फल नहीं जाती" । आज माचष 2026   की इस शांत
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