Page 241 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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                                    सपनों का पल्लवन


                          एक गौरवशाली वतषमान (माचष 2026 )

                                                        े
                     समय की गमत अनंत है, लमकन जब हम पीछ मुडकर देखत हैं, तो संघर्  ष
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                                                                   े
              की पगडंमडयों पर छोड गए पदमचह्न ही हमारी पहचान बनत हैं। आज माचष 2026
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              में, जब म अपनी लखनी उठाता ह ाँ, तो मरा मन संतोर् और कृतज्ञता क भाव स  े
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                      ैं
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                                                                      े
              भर जाता है। बरदू की उस ममट्टी स शुऱू हुआ 'आनंद' का सफर, आज 'डॉ. अनार
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              मसंह ठाकुर' क ऱूप म एक ऐस मुकाम पर है जहााँ हर तरफ खुशहाली की फसल
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              लहलहा रही है ।
               कमषक्षत्र की मनरंतरता: बमटयों का भमवष्य
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                     आज भी मरी सुबह शासकीय कन्या उच्चतर माध्यममक मवनॏयालय,
              टोंकखुदष की प्राथषना और उन मासूम छात्राओं की मुस्कान स शुऱू होती है । एक
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              उच्च माध्यममक मशक्षक क ऱूप म अथषशास्त् क मसद्ांतों को पढात हुए, मैं असल
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              म उन्हें जीवन का अथषशास्त् मसखाने का प्रयास करता ह ाँ । 'एमशयन एजुकशन
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              अवाड'  (2021)  और  'बेस्ट  टीचर  अवाड'  (2025)  जैसे  सम्मानों  ने  मेर  े
              उत्तरदामयत्व को और बढा मदया है । मरा लक्ष्य कवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं,
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              बमल्क टोंकखुदष की इन बमटयों को इतना सशि बनाना है मक व सात समंदर पार
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              तक अपनी पहचान बना सक ।
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              क ु ल का गौरव: मखलता नया पोधा
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                     एक मपता क मलए इसस बडी उपलमब्ध क्या होगी मक उसक संस्कार
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              उसक बच्चों की सफलता में प्रमतध्वमनत हों। मेरा बडा बेटा, क ुं वर योगेंि मसंह
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                                                             ें
              ठाक ु र (राज), मजसने 29  अगस्त 2001  को हमार घर म खुमशयों की पहली
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              मकरण मबखेरी थी, आज अपने कररयर क एक मनणाषयक मोड पर है । राज वतषमान
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