Page 237 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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कमषस्थली क सारथी
मवनॏयालय और सहयोमगयों का संबल
जीवन क इस पडाव पर, जहााँ उपलमब्धयां और सम्मान एक ओर खड े
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हैं, वहीं दूसरी ओर वह नींव है मजसने मुझ खडा होने का हौसला मदया। मरी
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वतषमान कमषस्थली, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यममक मवनॏयालय टोंकखुदष, मेर े
मलए कवल एक कायषस्थल नहीं, बमल्क एक साधना कि है। यहााँ की ममट्टी और
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यहााँ क सहकममषयों ने मेर व्यमित्व को जो मवस्तार मदया है, उसका वणषन शब्दों
में करना कमठन है।
नेतृत्व और प्रेरणा की छांव
मकसी भी संस्थान की प्रगमत उसक कुशल नेतृत्व पर मटकी होती है।
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हमारी मवनॏयालय की प्राचायष, श्रीमती अंमबका सोमानी जी, कवल एक
प्रशासमनक प्रमुख नहीं, बमल्क एक मागदशक की भूममका म रहीं। उन्होंने न
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कवल मुझ अपने नवाचारों क मलए प्रोत्सामहत मकया, बमल्क जब भी मुझ े
सहयोग की आवश्यकता हुई, वे एक ढाल बनकर साथ खडी रहीं। उनक
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मोमटवेशन (Motivation) ने ही मुझ कमठन स कमठन चुनौमतयों को मुस्कुराकर
पार करने की शमि दी।
सहयोग की एक अटूट श्रृंखला
एक अच्छा मशक्षक तभी सफल होता है जब उसे एक बेहतरीन टीम का
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साथ ममल। मुझ गव है मक मर पास ऐस सामथयों का समूह है जो मशक्षा क प्रमत
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सममपषत हैं। अचषना प्रजापमत जी, मीना मनगम जी, साक्षी सूयषवंशी जी और समीर
सैयद अली जी— ये वे नाम हैं मजन्होंने मवनॏयालय क वातावरण को ऊजाषवान
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बनाए रखा। चाहे वह जल संरक्षण का अमभयान हो या छात्रों क बीच 'आनंदम'
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