Page 233 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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सफलता क आधार स्तंभ
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मेरा कमषठ सहयोगी दल
मकसी भी मवशाल वटवृक्ष की ऊ ं चाई उसकी टहमनयों स मापी जाती है,
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लेमकन उसकी मस्थरता उन जडों में मनमहत होती है जो जमीन क भीतर मौन रहकर
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उसे थामे रखती हैं। भारत हायर सकडरी स्क ू ल, मशवम ब्रेनी मबयर स्क ू ल और
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मशवम इंस्टीट्यूट, टोंक खुदष आज यमद नगर की सवश्रेष्ठ मशक्षण संस्थाओं म ें
अग्रणी हैं, तो इसका संपूण श्रेय उन कमयोमगयों को जाता है मजन्होंने मर मवजन
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को अपना संकल्प बना मलया।
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मरी आत्मकथा का यह अध्याय उन पांच व्यमित्वों को सममपषत है,
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मजनक मबना इन संस्थानों क सफल संचालन की कल्पना करना भी असंभव था।
दीपेंि मसंह ठाक ु र, युवराज मसंह झाला, ईश्वर मसंह राजपूत, शमशकांत मंडलोई
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और ऋतुराज मसंह गोमहल — ये कवल नाम नहीं, बमल्क मरी संस्था क व पांच
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तत्व हैं मजनस इसकी साख मनममत हुई है।
1. दीपेंि मसंह ठाक ु र: मनष्ठा और समपषण का पयाषय
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संस्थान क शुरुआती मदनों स लकर आज की भव्यता तक, दीपेंि मसंह
ठाकुर एक ढाल की तरह खड रहे हैं। जब भी प्रबंधन क सामने कोई बडी चुनौती
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आई, दीपेंि ने उसे अपनी व्यमिगत समस्या मानकर हल मकया। उनका कायष क
प्रमत समपषण ऐसा है मक उन्हें कभी समय या थकान की परवाह नहीं रही।
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दीपेंि ने न कवल प्रशासमनक कायों को सुव्यवमस्थत मकया, बमल्क
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मशक्षकों और कमचाररयों क बीच एक सतु का कायष भी मकया। उनकी कायषशली
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म एक मवशर् अनुशासन है, जो छात्रों क मलए प्रेरणा का कि बना। आज यमद
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