Page 230 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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                                      बचपन से पचपन तक


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                               एक छत क नीचे मशक्षा का साम्राज्य
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                     मेरी जीवन-यात्रा कवल संघर्ों और व्यमिगत सफलताओं की कहानी
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              नहीं है, बमल्क यह उस संकल्प की मसमद् है मजसने टोंकखुदष की माटी म मशक्षा
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              का एक वटवृक्ष रोप मदया है। जहााँ एक समय मुझ मशक्षा क मलए कीचड भर  े
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              रास्तों और अभावों से लडना पडा था, आज वही टोंकखुदष मर िारा स्थामपत
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              संस्थानों क माध्यम स हज़ारों युवाओं क भमवष्य का माग प्रशस्त कर रहा है।
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                      मशवम ब्रेनी बयर स्क ू ल: नन्हे कदमों की मज़बूत नींव
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                     मशक्षा की शुरुआत यमद संस्कारों और आधुमनकता क संगम स हो, तो
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              व्यमित्व मनखर उठता है। इसी मवचार को धरातल पर उतारने क मलए हमने
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              'मशवम ब्रेनी बयर स्क ू ल' की स्थापना की। यह टोंकखुदष नगर का एक मात्र ऐसा
              सवष-सुमवधा युि स्कूल है जो 'प्ल ग्रुप' से लेकर कक्षा 8वीं तक अंग्रेजी माध्यम
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              में मशक्षा प्रदान करता है। यहााँ हम कवल मकताबी ज्ञान नहीं देते, बमल्क नन्हे
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              बच्चों की प्रमतभा को आधुमनक वज्ञामनक पद्मतयों स तराशत हैं। जब मैं इन
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              छोटे बच्चों को खेल-खल म भमवष्य क सपने बुनत देखता ह ाँ, तो मुझ अपनी वह
              प्राथममक मशक्षा याद आती है जब सुमवधाओं क नाम पर कवल टाट-पट्टी हुआ
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              करती थी ।
                            भारत हायर सकडरी स्क ू ल: टोंकखुदष का गौरव
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                     1999  म अगरोद स शुऱू हुआ प्राथममक मशक्षा का सफर वर् 2001
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              और 2006  में 'भारत हाई स्क ू ल' और 'भारत हायर सकडरी स्क ू ल' क ऱूप में
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              टोंकखुदष का श्रेष्ठ संस्थान बन गया । यह स्कूल आज महंदी और अंग्रेजी दोनों
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              माध्यमों में मशक्षा का कि है। हमने यहााँ जीवमवज्ञान, गमणत, आट्षस और कॉमस  ष
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