Page 226 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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जब ज्यूरी िारा मर इस सारगमभत आलख का चयन मकया गया, तो वह
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कवल मेरा सम्मान नहीं था, बमल्क उन मवचारों की जीत थी जो भारत को मफर
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से 'मवश्वगुरु' क ऱूप में देखना चाहते हैं।
तक्षमशला पररसर में वह गररमामय संध्या
सम्मान समारोह का आयोजन इंदौर मस्थत देवी अमहल्या मवश्वमवनॏयालय
(DAVV) क ऐमतहामसक तक्षमशला पररसर में मकया गया। वहााँ का वातावरण
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ज्ञान और मवमश की खुशबू स सराबोर था। मंच पर 'भारत उदय' लेखन
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प्रमतयोमगता क संयोजक अममत राव पवार जी और नमदा सामहत्य मंथन क
संयोजक श्रीरंग पेंढारकर जी जैसे मदग्गज व्यमित्व आसीन थे।
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जब उद्घोर्क ने टोंकखुदष क प्रमतमनमध क ऱूप म मरा नाम पुकारा, तो
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वह क्षण मर मलए आत्मगौरव स भरा हुआ था। मंचासीन अमतमथयों क कर-
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कमलों स जब मने वह प्रमाण पत्र और स्मृमत मचह्न स्वीकार मकया, तो मुझ लगा
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मक सरस्वती की साधना सफल हो गई है। वह सम्मान पत्र कवल एक कागज़ का
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टुकडा नहीं, बमल्क मेरी वर्ों की शैमक्षक सेवा और लेखन क प्रमत समपषण का
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प्रतीक था।
अपनों का प्यार और शुभकामनाओं का संबल
सामहमत्यक उपलमब्धयां तब और भी मीठी हो जाती हैं जब उनम अपनों
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की खुशी शाममल हो। मरी इस सफलता की गूज जब टोंकखुदष पहुाँची, तो क्षेत्र क
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गणमान्य जनों क प्रेम ने मुझ भाव-मवभोर कर मदया। सुरि सधव जी, राज भंवर
ठाक ु र जी और वररष्ठ समाजसेवी मवमल क ु मार जैन जी की बधाइयों ने मेरा
उत्साहवधषन मकया।
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मवशर् ऱूप से, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यममक मवनॏयालय टोंकखुदष
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क मेर सहयोमगयों— कमल मसंह टांक जी और प्राचायष अंमबका सोमानी जी की
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