Page 222 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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डॉ. अनार मसंह ठाकुर क मलए यह पुरस्कार कवल एक रॉफी या प्रमाण पत्र नहीं
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है। उनक शब्दों में:
"मरी पीएचडी की मडग्री ने मुझ ज्ञान मदया, लमकन ऑनलाइन टीमचंग क दौरान
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ममल छात्रों क प्रेम और इस वमश्वक सम्मान ने मुझ 'साथषक जीवन' का अनुभव
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कराया। यह सम्मान उन सभी मवनॏयामथषयों क नाम है मजन्होंने मवपरीत पररमस्थमतयों
में भी पढना नहीं छोडा।"
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वल्ड एक्सीलस बुक ऑफ ररकॉड्षस (मवश्व कीमतमान) पर
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"टोंकखुदष की माटी स 'वल्ड एक्सीलस बुक ऑफ ररकॉड्षस' तक; यह
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सम्मान एक व्यमि का नहीं, बमल्क आपदा को अवसर में बदलने वाले एक
मशक्षक क जज्बे का है।"
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"इमतहास वही रचते हैं जो मवपरीत पररमस्थमतयों में भी रुकना नहीं जानते।
डॉ. ठाकुर का नाम आज स्वणाषक्षरों म दज है, क्योंमक उन्होंने महामारी को
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मशक्षा क मागष का रोडा नहीं, बमल्क सीढी बनाया।"
मशक्षण धमष और सेवा भाव पर
"मडग्री ने ज्ञान मदया, पर ऑनलाइन मशक्षण क दौरान ममले हज़ारों छात्रों क
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प्रेम और इस वैमश्वक सम्मान ने जीवन को साथषकता दी।"
"सच्चा मशक्षक वही है जो भूगोल की सीमाओं को तोड दे; ज़ूम और
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यूट्यूब को क्लासऱूम बनाकर डॉ. ठाकुर ने प्रदेश क हर घर तक मशक्षा की
रोशनी पहुाँचाई।"
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