Page 225 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                               ाँ
                     कलम की गूज — 'भारत उदय' और तक्षमशला का सम्मान
                     एक मशक्षक का जीवन कवल कक्षाओं की चारदीवारी तक सीममत नहीं
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              होता, बमल्क उसका असली मवस्तार उसक मवचारों और उसकी लेखनी में होता
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              है। वर्ष 2026 मेर सामहमत्यक जीवन क मलए एक स्वमणषम अध्याय लेकर आया।
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              नमषदा सामहत्य मंथन िारा आयोमजत 'भारत उदय' लेखन प्रमतयोमगता क 'पंचम
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                                 ै
              सोपान' ने मुझ अपनी वचाररक अमभव्यमि का एक मवराट मंच प्रदान मकया।
                     मचंतन का मवर्य: भारतीय मौमलक मशक्षा और उसका ह्रास
                                                                   प्रमतयोमगता
                                                            क मलए मैंने एक ऐसे
                                                             े
                                                            मवर्य  का  चयन
                                                                            े
                                                                      े
                                                            मकया जो मेर हृदय क
                                                            अत्यंत समीप था—
                                                            "भारतीय  मौमलक

                                                            मशक्षा  पद्मत  और
                                                            उसका  ह्रास"।  एक

                                                            मशक्षक होने क नाते,
                                                                       े
                                                             ैं
                                                            मने अपनी आंखों स  े
                                                            आधुमनकता      की
                                                                  े
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              अंधी दौड म अपनी प्राचीन और समृद् मशक्षा प्रणाली को मबखरत देखा है। मने
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              अपने आलख म उन तकों और तथ्यों को मपरोया मक कस हमारी गुरु-मशष्य
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              परंपरा और संस्कार आधाररत मशक्षा का स्थान आज कवल सूचनात्मक मशक्षा
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              ने ले मलया है।

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