Page 228 - आनंद से अनार तक
P. 228

आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
                                                 े

                                    बूंद-बूंद का संकल्प


                                'जल चैंमपयन' का उत्तरदामयत्व

                                       े
                     जीवन कवल सााँसों क चलने का नाम नहीं है, बमल्क उस चेतना का
                            े
                                        े
                                                                    े
                                                                            े
                                                        े
              नाम है जो समाज और प्रकृमत क प्रमत अपनी मजम्मदारी को समझ। मशक्षा क
              क्षेत्र में दशकों तक अक्षरों की खेती करने क बाद, मरा मन प्रकृमत क उस सबस  े
                                                                   े
                                                       े
                                                े
              अनमोल रत्न की ओर मुडा मजसक मबना सृमि की कल्पना भी असंभव है—
                                          े
              'जल'।
                                         े
                                   े
                     मवगत एक वर्ष मेर मलए कवल अध्यापन का नहीं, बमल्क 'जल-साधना'
                          ैं
                    ष
              का वर् रहा। मने अनुभव मकया मक यमद आज हमने अपनी आने वाली पीढी को
              पानी बचाना नहीं मसखाया, तो भमवष्य की मकताबों में नमदयााँ कवल मचत्र बनकर
                                                               े
              रह जाएंगी।
                     वॉटरएड इंमडया (WaterAid India) और वैमश्वक पहचान
                                   े
                                                             ै
                       े
                     मेर इन छोटे-छोट प्रयासों को जब अंतरराष्रीय गर-लाभकारी संस्था
                                                े
                                                 े
              'वॉटरएड इंमडया' ने पहचाना, तो वह क्षण मर संकल्प को महमालय जसी मजबूती
                                                                   ै
                                                                    े
                                     े
              देने वाला था। संस्था ने मुझ 'जल चैंमपयन' (Jal Champion) क गौरवपूण  ष
              प्रमाण पत्र स नवाजा। यह सम्मान कवल डॉ. अनार मसंह ठाकुर का नहीं था,
                                            े
                         े
                                          े
                                                                े
              बमल्क उन मासूम छात्र-छात्राओं क संकल्प का था मजन्होंने मर साथ ममलकर
                                                                 े
              पानी की एक-एक बूंद को सहेजने की शपथ ली थी।
                     प्रमाण पत्र में मेर िारा मकए गए 'मडमजटल जागऱूकता' प्रयासों और
                                   े
                                                       े
              सामुदामयक मवस्तार की सराहना की गई, मजसस मुझ यह संतोर् हुआ मक
                                                           े
                                                               े
              आधुमनक तकनीक का सही उपयोग समाज की प्यास बुझाने क काम आ सकता
              है।
              218 | P a g e
   223   224   225   226   227   228   229   230   231   232   233