Page 232 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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क्षेत्रों में मशक्षा का प्रचार-प्रसार" एक कागज़ी दस्तावेज़ था, आज ये संस्थान उस
शोध का जीवंत प्रमाण हैं।
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"कल मजस धूल भरी पगडंडी पर म नंग पैर चला था, आज उसी रास्ते
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पर मर छात्र अपनी सफलता की गामडयााँ दौडा रहे हैं। यही डॉ. अनार मसंह ठाकुर
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क जीवन की साथषकता है।"
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प्रेरणा और संघर्ष पर
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"कल मजस धूल भरी पगडंडी पर म नंग पैर चला था, आज उसी रास्ते पर
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मेर छात्र अपनी सफलता की गामडयााँ दौडा रहे हैं—यही मेर जीवन की
असली साथषकता है।"
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"संघर् की कीचड स मनकलकर संकल्प का वटवृक्ष बनने तक की यात्रा का
नाम है—डॉ. अनार मसंह ठाकु र।"
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मशक्षा क साम्राज्य पर (बचपन से पचपन तक)
"मशक्षा का ऐसा संगम जहााँ नींव भी मज़बूत है और आसमान भी पास है;
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टोंकखुदष की माटी म मखला, 'बचपन से पचपन' तक का मवश्वास है।"
"एक छत, अनेक सपने और हज़ारों भमवष्य—मशवम और भारत संस्थानों
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क साथ टोंकखुदष अब मशक्षा का नया पयाषय है।"
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