Page 235 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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              उन्होंने संकट क समय म कभी अपना धैयष नहीं खोया, बमल्क अपनी सूझबूझ स  े
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              संस्था को हर मुमश्कल स बाहर मनकाला।
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                     4. शमशकांत मंडलोई: शैक्षमणक उत्कृिता क मशल्पी
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                     एक मशक्षक और मागदशक क ऱूप म शमशकांत मंडलोई का योगदान
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              अतुलनीय है। भारत हायर सकडरी स्कूल को कवल एक 'भवन' से 'मवनॏया का
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              मंमदर' बनाने म शमशकांत जी की अकादममक दृमि का बडा हाथ है। उन्होंने
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              मशक्षण की गुणवत्ता स कभी समझौता नहीं मकया।
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                     मशक्षकों को प्रमशमक्षत करना हो या मवनॏयामथषयों की समस्याओं का
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              व्यमिगत स्तर पर मनराकरण, शमशकांत जी ने हर मजम्मदारी को पूरी तन्मयता स  े
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              मनभाया। उनक मागदशन म मवनॏयामथषयों क परीक्षा पररणामों म जो सुधार आया,
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                                                                      े
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              उसी का पररणाम है मक आज टोंक खुदष और आसपास क क्षत्रों म हमार संस्थान
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              का नाम सम्मान क साथ मलया जाता है। वे मशक्षा क प्रमत इतने सममपषत हैं मक
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              उनका पूरा जीवन मवनॏयामथषयों क उत्थान क मलए सममपषत जान पडता है।
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                     5. ऋतुराज मसंह गोमहल: प्रबंधन और व्यवस्था क सूत्रधार
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                     ऋतुराज मसंह गोमहल संस्था क वह मूक योद्ा हैं, जो पदे क पीछ रहकर
              सब कुछ व्यवमस्थत रखत हैं। मशवम इंस्टीट्यूट और अन्य मवनॏयालयों क सुचाऱू
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              संचालन म ऋतुराज की प्रबंधकीय क्षमताएं अद्भुत रही हैं। अनुशासन बनाए
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              रखना और हर संसाधन का सही उपयोग सुमनमित करना उनकी मवशर्ता है।
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                     ऋतुराज क कायष करने क ढंग म एक प्रकार की सौम्यता और दृढता का
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              ममश्रण है। उन्होंने स्टाफ और छात्रों क बीच एक ऐसा अनुशासन स्थामपत मकया
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              जो भय पर नहीं, बमल्क सम्मान पर आधाररत है। उनकी सजगता क कारण ही
              संस्था आज एक व्यवमस्थत तंत्र की तरह काम कर रही है। ऋतुराज ने हर
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              मजम्मदारी को अपना धम माना और उस पूरी पमवत्रता क साथ मनभाया।
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