Page 234 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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हमार संस्थान म व्यवस्थागत सुदृढता मदखती है, तो उसक पीछ दीपेंि की मदन-
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रात की महनत और अटूट मनष्ठा है। व मर दामहने हाथ की तरह हैं, मजन पर आाँख
बंद करक भरोसा मकया जा सकता है।
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2. युवराज मसंह झाला: नवाचार और गमतशीलता क सारथी
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युवराज मसंह झाला का व्यमित्व ऊजाष स ओत-प्रोत है। मशवम ब्रेनी
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मबयर स्कूल जस आधुमनक मशक्षण पररवश को ग्रामीण और अधष-शहरी क्षेत्र में
स्थामपत करना एक कमठन कायष था, लमकन युवराज की दूरदमशता ने इस संभव
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बनाया। उन्होंने आधुमनक तकनीक और खल-खेल में मशक्षा की पद्मत को इतनी
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सहजता स लागू मकया मक बच्चे स्कूल आने क मलए उत्सामहत रहने लग।
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युवराज म एक अद्भुत खूबी है—पररमस्थमतयों क अनुसार खुद को
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ढालना। नगर की सवश्रेष्ठ संस्थानों म हमारी मगनती होने का एक बडा कारण यह
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भी है मक हमने युवराज क नेतृत्व म समय क साथ बदलावों को स्वीकार मकया।
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उनक नवीन मवचार और काम करने की तीव्र गमत ने संस्थान को हमेशा प्रमतस्पधाष
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में सबसे आगे रखा है।
3. ईश्वर मसंह राजपूत: मवश्वास और स्थामयत्व क प्रतीक
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ईश्वर मसंह राजपूत का नाम आत ही मन म एक ऐस व्यमि की छमव
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उभरती है जो 'कम ही पूजा है' क मसद्ांत पर चलता है। मकसी भी शक्षमणक
संस्थान की सफलता इस बात पर मनभर करती है मक वहां का वातावरण मकतना
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सकारात्मक है। ईश्वर मसंह जी ने संस्थान म मवश्वास की वह नींव रखी, मजस पर
आज हजारों मवनॏयामथषयों का भमवष्य खडा है।
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चाहे वह मवनॏयालय का बुमनयादी ढांचा हो या बाहरी जनसंपक, ईश्वर
मसंह जी ने हर मोचे पर अपनी योग्यता मसद् की है। उनकी ईमानदारी और
पारदमशता ने अमभभावकों क मन म संस्थान क प्रमत अटूट मवश्वास पैदा मकया।
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