Page 231 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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जस बहु-मवर्यक संकाय शुऱू मकए तामक ग्रामीण युवाओं को उनक अपने ही
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नगर में वह सब ममल सक मजसक मलए कभी हमें शहरों की ओर पलायन करना
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पडता था । आज यह कवल एक स्कूल नहीं, बमल्क टोंकखुदष की पहचान है।
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मशवम इंस्टीट्यूट: बचपन स पचपन तक की यात्रा
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मरा सबस बडा सपना तब साकार हुआ जब हमने 'मशवम इंस्टीट्यूट'
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क माध्यम स यूजी (UG) और पीजी (PG) पाठ्यक्रमों का सफल संचालन शुऱू
मकया । आज गौरव क साथ यह कहा जा सकता है मक टोंकखुदष क युवाओं को
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"बचपन से पचपन तक की मशक्षा" एक ही छत क नीचे ममल रही है। हमने
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तकनीकी मशक्षा (AISECT) क साथ-साथ इग्नू (IGNOU) क माध्यम से
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हज़ारों युवाओं को मशक्षक बनने क योग्य बनाया ।
कौशल मवकास और रोज़गार का संगम
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मशक्षा कवल मडग्री पाने का साधन नहीं, बमल्क हाथ को हुनर देने का
माध्यम होनी चामहए। इसी सोच क साथ इन संस्थानों म मवमभन्न कौशलों
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(Skills) क कोस संचामलत मकए जा रहे हैं। मुझ आमत्मक संतोर् तब ममलता है
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जब म देखता ह ाँ मक हमार संस्थानों स मनकल हज़ारों युवा आज देश क मवमभन्न
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महस्सों में सरकारी और गैर-सरकारी नौकररयों में अपनी सेवाएाँ दे रहे हैं। इग्नू सटर
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से मनकले 170 से अमधक छात्रों का सरकारी मशक्षक क ऱूप में चयन होना,
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हमार शक्षमणक संकल्प की सबस बडी मुहर है।
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एक सामामजक उत्तरदामयत्व
यह संस्थानों की श्रृंखला कवल एक उनॏयमी का प्रयास नहीं है, बमल्क
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'गुरुक ु ल मशक्षा मवकास समममत' का वह सामूमहक संकल्प है, मजसे मेर भाइयों,
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ममत्रों और शुभमचंतकों ने अपने पसीने स सींचा है। जहााँ मरा शोध "दूरस्थ ग्रामीण
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