Page 221 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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2. 'मडमजटल अवतार' और हजारों मवनॏयामथषयों का भमवष्य
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डॉ. ठाकुर का यह मडमजटल अमभयान कवल टोंक खुदष तक सीममत नहीं रहा।
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उनक ऑनलाइन लक्चस और नवाचारी मशक्षण पद्मत ने भौगोमलक सीमाओं
को तोड मदया।
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• हजारों मवनॏयाथी: उनक सरल और प्रभावी मशक्षण क कारण प्रदेश भर
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क छात्र उनस जुडने लग।
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• नवाचार: उन्होंने कमठन आमथषक मसद्ांतों को मडमजटल टूल्स क
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माध्यम स इतना सरल बना मदया मक इंटरनेट की धीमी गमत क बावजूद
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छात्र एकाग्रता से पढते रहे।
• धैयष की परीक्षा: स्वयं कोरोना स जूझने क बावजूद, उन्होंने अपनी
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कक्षाओं की मनरंतरता को टूटने नहीं मदया। उनका लपटॉप कवल एक
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मशीन नहीं, बमल्क हजारों छात्रों की उम्मीदों का पुल बन गया था।
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3. 'वल्ड एक्सीलस बुक ऑफ ररकॉड्षस' का ऐमतहामसक क्षण
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मदसंबर 2025 म जब उन्हें इस अंतरराष्रीय सम्मान क मलए चुना गया, तो यह
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उनक पााँच वर्ों क मनरंतर संघर् और 'ऑनलाइन मशक्षण' क प्रमत उनक समपषण
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का पररणाम था। 'वल्ड एक्सीलस बुक ऑफ ररकॉड्षस' में नाम दजष होना इस बात
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की पुमि थी मक "एक मशक्षक चाहे तो आपदा को भी एक महान अवसर में बदल
सकता है।"
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पुरस्कार समारोह क दौरान जूरी ने मवशर् ऱूप स इस बात का उल्लख मकया मक
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डॉ. ठाकुर ने मकस प्रकार तकनीक का उपयोग करक ग्रामीण और शहरी छात्रों
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क बीच की खाई को पाटा और महामारी क दौरान 'लमनिंग लॉस' (मशक्षा की
हामन) को न्यूनतम मकया।
4. जीवन का सार: मडग्री से ऊपर सेवा
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