Page 242 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

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              में BAMS क फाइनल ईयर इंदौर म अध्ययनरत है। वह आयुवद की उस प्राचीन
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              मवधा को आत्मसात कर रहा है जो मानवता की सेवा का सबसे पमवत्र मागष है।
              वहीं, मेरा छोटा बेटा अवधेश प्रताप मसंह ठाक ु र, मजसका जन्म 4  जुलाई 2005

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              को हुआ था, आज अपनी मधा और प्रबंधन कौशल स हम गौरवामन्वत कर रहा
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              है । अवधेश वतषमान में MBA क मितीय वर्ष में है। जहााँ बड बेट ने स्वास्थ्य
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              सवा को चुना, वहीं छोट ने आधुमनक प्रबंधन की दुमनया म कदम रखा है। इन
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              दोनों को देखकर मुझ अपनी पत्नी ममता ठाक ु र क उस धैयष और तपस्या की याद
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              आती है, मजसने मर सामामजक संघर्ों क बीच इन बच्चों की परवररश को कभी
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              प्रभामवत नहीं होने मदया ।
               भ्रातृ प्रेम और व्यावसामयक सफलता
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                     मेर जीवन की कहानी मेर छोटे भाई सुमेर मसंह ठाक ु र क मबना अधूरी
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              है। वह गुब्बार की लडाई स लकर पीएचडी की मडग्री लने मदल्ली जाने तक, हर
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              कदम पर मेरा साया बना रहा । आज सुमर का मप्रंमटंग का मबजनेस (मशवम मप्रंटस)
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              अपनी ऊ ं चाइयों पर है । उसकी कडी महनत और व्यावसामयक सूझबूझ ने उस  े
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              क्षेत्र में एक प्रमतमष्ठत नाम बना मदया है। हमार भाइयों का वह अटूट बंधन, जो
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              माता-मपता क जाने क बाद और भी मज़बूत हुआ, आज हमारी सबसे बडी शमि
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              अंजली का मववाह: ररश्तों का नया संगम
              हाल ही में, 11  माचष 2026   का मदन हमार पररवार क मलए उत्सव का महाकुं भ
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              बन गया। मर छोट भाई सुमर मसंह ठाकुर की सुपुत्री, अंजली ठाक ु र का मववाह
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              आिा मनवासी श्री तज मसंह जी भाटी क सुपुत्र अमभर्ेक भाटी क साथ अत्यंत
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              धूमधाम स संपन्न हुआ।
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