Page 100 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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एक नया मेहमान: हमार छोट बट का जन्म
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(मदनांक 04 जुलाई, 2005)
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मेर जीवन में वर् 2001 में बड बेट राज का आगमन, एक ऐसी खुशी
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लकर आया था मजसकी तुलना मकसी स नहीं की जा सकती। लमकन हर माता-
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मपता की तरह, हम पमत-पत्नी भी अपने पररवार को पूरा होत देखना चाहत थे।
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मेरी पत्नी, श्रीमती ममता ठाक ु र, और मैं अक्सर यह सोचते थे मक अगर हमारी
दूसरी संतान एक बटी होती, तो मकतना अच्छा होता। एक बेटा और एक बेटी—
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एक ऐसा पररवार जो हर
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मायनों म पूण होता। हमने
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भगवान से यही प्राथषना
की थी, लेमकन जीवन में
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हर चीज़ हमारी इच्छा क
अनुसार नहीं होती।
भगवान की अपनी
योजनाएाँ होती हैं, और हमें उन्हें स्वीकार करना पडता है।
आमखरकार, वह मदन आ ही गया जब हमार पररवार में एक और
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महमान का आगमन हुआ। मदनांक 04 जुलाई, 2005 को, हमार छोटे बेट का
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जन्म हुआ। जब हम यह पता चला मक हमारा दूसरा बच्चा भी बटा है, तो हमार े
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मन में ममली-जुली भावनाए थीं। एक तरफ तो हम बहुत खुशी थी मक हमारा
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पररवार और भी बडा हो गया था, वहीं दूसरी तरफ हमारी बटी की इच्छा अधूरी
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रह गई थी। लेमकन जब मैंने अपने नन्हे बेट को पहली बार अपनी गोद में मलया,
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तो मर सार मवचार और इच्छाए एक तरफ रह गई ं । उसकी मासूममयत और उसक
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छोटे-छोट हाथों ने मर मदल को छू मलया।
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