Page 105 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

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                   भारत हायर सकडरी स्क ू ल की नींव: एक बडा सपना
                                       (मदनांक 15 जून 2006)
                     गुरुकुल मशक्षा मवकास समममत का हमारा ममशन, जो मशवम इंस्टीट्यूट
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              और भारत स्क ू ल अगरोद की स्थापना क साथ शुऱू हुआ था, अब एक नए और
              महत्वपूण पडाव पर पहुाँच रहा था। हमने जहााँ प्राथममक और माध्यममक मशक्षा
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              क मलए एक मजबूत नींव रखी थी, वहीं हमार सामने यह चुनौती थी मक हमार  े
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              छात्र कक्षा आठवीं और दसवीं क बाद कहााँ जाएग। ग्रामीण अंचल क बच्चों
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              को उच्च मशक्षा क मलए शहरों की ओर पलायन करना पडता था, जो उनक और
              उनक पररवारों क मलए एक बडी आमथषक और सामामजक चुनौती थी। हम जानत  े
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              थे मक इस ममशन को पूरा करने क मलए हम एक ऐसी संस्था की स्थापना करनी
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              होगी जो उन्हें उनक अपने ही नगर में उच्च माध्यममक मशक्षा प्रदान कर।
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                     इसी सोच क साथ, हमारी समममत ने एक बडा और साहमसक फसला
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              मलया। मदनांक 15 जून 2006 को, हमने टोंक खुदष नगर म भारत हायर सेकडरी
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              स्क ू ल की नींव रखी। यह हमार मलए मसफ एक इमारत का मनमाषण नहीं था, बमल्क
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                                                        यह हमार समुदाय को एक
                                                        पूण शमक्षक पथ देने का
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                                                        संकल्प था। इस स्कूल की
                                                        स्थापना का उद्देश्य कक्षा
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              9वीं से 12वीं तक क छात्रों को गुणवत्तापूण मशक्षा प्रदान करना था, मजससे वे
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              अपने भमवष्य क मलए पूरी तरह तयार हो सक।
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              भारत हायर सकडरी स्कू ल को हमने एक बहु-मवर्यक संस्थान क ऱूप म मडज़ाइन
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              मकया, तामक हर छात्र अपनी रुमच और क्षमता क अनुसार अपना रास्ता चुन
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              सक। हमने इसम चार मुख्य संकायों (स्रीम) की शुरुआत की:
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