Page 106 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                  •  जीवमवज्ञान (Biology)

                  •  गमणत (Mathematics)
                  •  आट्षस (Arts)

                  •  कॉमसष (Commerce)
              इन चारों संकायों को शुऱू करने का हमारा मुख्य लक्ष्य ग्रामीण युवाओं को

              मवमभन्न कररयर मवकल्पों क मलए तैयार करना था। जहााँ जीवमवज्ञान और गमणत
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              संकाय ममडकल और इंजीमनयररंग जस क्षत्रों क मलए छात्रों की नींव मजबूत कर
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              रहे थे, वहीं आट्षस और कॉमस संकाय उन्हें प्रशासमनक सवाओं और व्यापाररक
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              दुमनया क मलए तयार कर रहे थे।
                     इस नए संस्थान क सफल संचालन क मलए, हमने एक मजबूत और
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              सममपषत टीम का गठन मकया। इस कायषभार को हमारी संचालन समममत ने
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              संभाला, मजसने हर मनणय म दूरदमशता और समपषण का पररचय मदया। इस
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              महत्वपूण कायष म हमारा मागदशन और नेतृत्व करने की मजम्मदारी श्री दीपेंि
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              मसंह सधव को सौंपी गई, जो हमार प्राचायष थे। उनकी कु शल प्रबंधन क्षमता और
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              मशक्षा क प्रमत उनक जुनून ने इस स्कूल को सफलता की राह पर चलने म मदद
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                     आज जब म भारत हायर सकडरी स्कूल क भव्य भवन को देखता ह ाँ,
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              तो मुझ अपने और मर सामथयों क सामूमहक प्रयासों पर बहुत गव महसूस होता
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              है। यह स्कूल हमार ममशन की सफलता का एक प्रतीक है, मजसने हजारों ग्रामीण
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              बच्चों को उनक अपने गााँव में ही एक उज्ज्वल भमवष्य का अवसर मदया है। इस
              नींव ने न कवल इमारतों को खडा मकया, बमल्क अनमगनत सपनों को भी पूरा
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              करने का रास्ता मदखाया।
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