Page 109 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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                     चार मदन बीत चुक थे, लमकन उनकी तबीयत म कोई सुधार नहीं हो रहा
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              था। हमारी उम्मीद धीर-धीर कम होती जा रही थी। हमार चेहर पर मनराशा और
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              डर साफ मदखने लगा था। हर गुजरता पल हम बचैन कर रहा था। पााँचव मदन,
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                                                                        े
              माताजी की तबीयत और भी ज़्यादा खराब हो गई। उनकी सााँस बहुत तज़ हो
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              गई ं , और उनका शरीर मबलकु ल बजान सा लग रहा था। हम सब बहुत डर गए
              थे। हमने डॉ. सुनील शमाष जी को बुलाया। डॉ. शमाष कमर म आए, उन्होंने
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              माताजी को देखा, और उनक चेहर पर एक ऐसी मनराशा थी जो हमें डरा रही थी।
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              उन्होंने हम बाहर बुलाया और हम सभी पररवार वालों को एक साथ खडा होने
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              क मलए कहा। उनक चेहर पर एक अजीब सी शांमत थी, लेमकन उनकी आाँखों में
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              एक गहरी पीडा थी। उन्होंने धीर से कहा, "अब मर बूत की बात नहीं है। मने
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              अपनी पूरी कोमशश की, मने पूर मनोबल स इनका इलाज मकया, लेमकन भगवान
                                                           की मजी कुछ और ही
                                                           है। अब आप इन्हें घर
                                                                         ें
                                                           ले जाकर सेवा कर।"
                                                                  डॉक्टर  की
                                                           यह  बात  सुनकर  हम
                                                           सब पर मानों आसमान
                                                                        े
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              टूट पडा। हमारी आखों म आसू आ गए। हम लगा मक हम हार गए हैं। हमार पास
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                                     ाँ
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                                                                         े
              अब कोई रास्ता नहीं बचा था। हम सब मनराशा और दुुःख म डूब चुक थे। लमकन
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              डॉ. शमाष ने अपनी बात पूरी नहीं की थी। उन्होंने कहा, "लेमकन अगर आप लोग
              कोई चमत्कार चाहते हैं, तो एक आमखरी कोमशश कर सकत हैं। आप इन्हें इंदौर
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              क बॉम्बे हॉमस्पटल में डॉ. मसंघई को मदखा दें। हो सकता है कोई चमत्कार हो
              जाए।"
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