Page 116 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
मशवम इंस्टीट्यूट का मवस्तार: एक नया अध्याय
( वर्ष 2007 )
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टोंक खुदष म मशवम इंस्टीट्यूट की स्थापना, मेर और मेर सामथयों क
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मलए कवल एक व्यापाररक उनॏयम नहीं, बमल्क एक ममशन था। 1998 में इसकी
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शुरुआत क बाद, हम बहुत जल्द यह एहसास हो गया था मक ग्रामीण अंचल म ें
तकनीकी मशक्षा की भूख बहुत ज़्यादा है। हमार संस्थान म छात्रों की बढती संख्या
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और उनकी सफलता ने हमें यह मवश्वास मदलाया मक हमें अपने ममशन को और
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आग बढाना होगा। एक ही शाखा क माध्यम स सभी तक पहुाँचना संभव नहीं
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था, और इसमलए, हमने अपने सपनों को पंख देने का फसला मकया।
वर् 2007 में, हमने मशवम इंस्टीट्यूट का मवस्तार करने का एक बडा
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और महत्वपूण मनणय मलया। यह मर मलए एक गव का क्षण था, क्योंमक यह मेर े
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पहल क संघर्ों और प्रयासों का
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फल था। हमने एक साथ दो नई
शाखाओं का शुभारंभ मकया,
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तामक देवास मजले क और भी
ज़्यादा छात्रों को गुणवत्तापूण ष
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तकनीकी और उच्च मशक्षा ममल सक।
पहली शाखा देवास शहर में राम नगर चौराहा पर खोली गई। देवास
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शहर, जहााँ कई गााँव क छात्र अपनी मशक्षा क मलए आते हैं, हमार मलए एक
स्वाभामवक मवकल्प था। दूसरी शाखा सोनकच्छ में डांग बंगला रोड पर शुऱू की
गई। सोनकच्छ एक ऐसा क्षेत्र था जहााँ उच्च मशक्षा क अवसरों की कमी थी, और
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हम यहााँ अपनी उपमस्थमत दज कराने की बहुत ज़ऱूरत थी।
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