Page 118 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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                           रोटरी क्लब टोंक खुदष: समाज सवा का जुनून

                                         (वर् 2007-2008)
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                     मेर जीवन में उनॏयममता और मशक्षा का सफर चल रहा था, लेमकन इसक
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              साथ-साथ, मर मन म समाज सवा का एक गहरा जूनून भी था। म हमशा स मानता
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                                                               ैं
                                                                 े
              था मक व्यमिगत सफलता का सही अथष तभी है जब हम समाज क मलए भी कुछ
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                                                             े
                                   े
              योगदान दें। इसी भावना क साथ, वर् 2007-2008 में मेर जीवन में एक और
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              महत्वपूण अध्याय जुडा—रोटरी क्लब टोंक खुदष का गठन।
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                     यह क्लब रोटरी क्लब भौरासा क मागषदशषन में गमठत मकया गया था।
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              इस क्लब का उद्देश्य टोंक खुदष और उसक आस-पास क क्षेत्रों में सामामजक सेवा
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                                                                    े
              क कायों को बढावा देना था। इस महत्वपूण मजम्मदारी को मनभाने क मलए, मैंने
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                                                       रोटरी क्लब टोंक खुदष क े
                                                       अध्यक्ष का पदभार ग्रहण
                                                       मकया।  यह  मेर  मलए  एक
                                                                   े
                                                       बहुत बडा सम्मान था और
                                                       एक  नई  चुनौती  भी।  एक
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                                                       मशक्षण    संस्थान   क
                                                       संचालक  और  एक
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              सरकारी मशक्षक क साथ-साथ, अब मर क ं धे पर समाज सवा की भी एक बडी
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              मजम्मेदारी थी।
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                     इस सफर म मुझ कुछ बहुत ही सममपषत और उत्साही सामथयों का साथ
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              ममला। हमार क्लब क सदस्यों में श्री कमल मसंह टांक, श्री गोक ु ल नागर, श्री सुरि
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              सैंधव, श्री राममूमत मबलावमलया और अन्य कई लोग शाममल थे। हम सब एक
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              ही उद्देश्य से प्रेररत थे—समाज क मलए कुछ अच्छा करना। हम सब ने ममलकर
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