Page 121 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
सत्र 2010-2011। हमने इस सीममत समय में छात्रों को सवषश्रेष्ठ मशक्षा देने का
संकल्प मलया।
हमार मशक्षकों की मेहनत और छात्रों की लगन का पररणाम जल्द ही
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सामने आया। जस ही दोनों सत्रों की परीक्षा का पररणाम घोमर्त हुआ, हमें एक
बहुत बडी और सुखद खबर ममली। मध्य प्रदेश सरकार ने मशक्षकों की भती
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मनकाली, और हमार संस्थान क 170 से अमधक छात्रों का चयन हो गया। यह
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हमार मलए कवल एक संख्या नहीं थी, बमल्क यह 170 से अमधक पररवारों क
सपनों का साकार होना था।
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उस मदन मुझ जो खुशी ममली, उस शब्दों म बयां नहीं मकया जा सकता।
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मरी आखों म खुशी क आसू थे। मर मन म संतोर् का भाव था मक मर संस्थान ने
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इन युवाओं क जीवन को एक नई मदशा दी। आज भी, जब मैं उन छात्रों से ममलता
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ह ाँ जो अब सफल मशक्षक बन चुक हैं, तो व मुझ शुभकामनाए देत हैं और अपनी
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सफलता का श्रेय मुझ और मर संस्थान को देत हैं। उनकी यह कृतज्ञता और उनक
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चेहर की खुशी मर जीवन की सबस बडी कमाई है।
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इग्नू का स्टडी सटर खोलना मर मलए एक व्यावसामयक फसला नहीं,
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बमल्क मर जीवन का एक सामामजक और भावनात्मक मनणय था। इस अनुभव
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ने मुझ यह मसखाया मक जब हम ईमानदारी और समपषण क साथ काम करत हैं,
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तो उसका फल न कवल हमें, बमल्क पूर समाज को ममलता है। यह अध्याय मर े
जीवन की एक ऐसी कहानी है जो हमशा मुझ प्रेररत करती रहेगी।
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