Page 126 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

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                     इसक अलावा, सुरि मर सुख-दुुःख म हमशा मर साथ खड रहे हैं। जीवन
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                                                         े
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              म जब भी कोई मुमश्कल घडी आई है, या जब भी मुझ मकसी आमथषक या
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              भावनात्मक सहार की ज़ऱूरत महसूस हुई है, तो मैंने उन्हें हमेशा अपने पास पाया
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              है। वह एक ऐसे व्यमि हैं मजन्होंने अपनी 'तन, मन, धन' से मेरा साथ मदया है।
              जब मुझ पैसों की ज़ऱूरत थी, तो उन्होंने कभी कोई सवाल नहीं पूछा और मरी
                                                                           े
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              मदद की। जब मुझ मकसी सलाह की ज़ऱूरत थी, तो उन्होंने अपनी व्यस्तता को
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              पर रखकर मेरा मागषदशषन मकया। और जब मैं उदास था, तो उन्होंने अपने शब्दों
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              और अपनी दोस्ती स मुझ सहारा मदया।
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                     आज जब म अपनी आत्मकथा मलख रहा ह ाँ, तो म सुरि सन्धव  क
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              प्रमत अपना गहरा आभार व्यि करना चाहता ह ाँ। वह मर जीवन म एक ऐस दोस्त
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              हैं मजनकी जगह कोई नहीं ले सकता। उनकी दोस्ती मेर मलए एक अनमोल
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              खज़ाना है। उन्होंने मुझ यह मसखाया मक सच्चा ममत्र वह नहीं होता जो मसर्फ
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              खुमशयों म साथ दे, बमल्क वह होता है जो हर मुमश्कल म एक चट्टान की तरह
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              खडा रहे। सुरि सन्धव  , आपकी दोस्ती और आपका साथ मेर मलए एक प्रेरणा
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              है। आप मर जीवन का एक ऐसा अटूट महस्सा हैं, मजस म कभी नहीं भूल सकता।
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