Page 123 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

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                                                                     े
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                     इस मवचार-मवमशष क बाद, हमने सवसम्ममत स अपनी स्वयंसवी संस्था
              का नाम "मशवम कला सामहत्य एवं सांस्कृमतक समममत" रखा। यह नाम हमार  े
                                                                           े
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              उद्देश्य को स्पि ऱूप से दशाषता था—कला, सामहत्य और और संस्कृमत क क्षत्र
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              में काम करना। हमारा मानना था मक कवल तकनीकी मशक्षा और आमथषक
              मवकास ही पयाषप्त नहीं है, बमल्क एक समृद् समाज क मलए सांस्कृमतक मवकास
                                                        े
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              भी  उतना  ही  ज़ऱूरी  है।  समममत  का  मुख्य  उद्देश्य  हमार  क्षत्र  क  कलाकारों,
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              सामहत्यकारों और सांस्कृमतक गमतमवमधयों को एक मंच प्रदान करना था, तामक
              उनकी प्रमतभा को सही पहचान ममल सक।
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                     मशवम कला सामहत्य एवं सांस्कृमतक समममत का गठन हमार मलए
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              कवल एक संस्था का मनमाषण नहीं था, बमल्क यह हमार सामूमहक संकल्प और
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              एक नए ममशन की शुरुआत थी। हमने यह तय मकया था मक हम इस समममत क
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              माध्यम से मनयममत ऱूप से सामहमत्यक गोमष्ठयााँ, कला प्रदशमनयााँ और सांस्कृमतक
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              कायषक्रम आयोमजत करगे, मजससे हमार क्षेत्र में कला और सामहत्य क प्रमत रुमच
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              बढे। हमारा मानना था मक ये गमतमवमधयााँ हमार युवाओं को रचनात्मकता और
              सकारात्मकता की ओर प्रेररत करगी।
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                     आज, यह बतात हुए मुझ बहुत गव हो रहा है मक मशवम कला सामहत्य
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              एवं सांस्कृमतक समममत आज भी पूरी लगन और समपषण क साथ कायष कर रही
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              है।  यह  संस्था  हमार  क्षत्र  क  कलाप्रेममयों  और  सामहत्यकारों  क  मलए  एक
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              महत्वपूण कि बन चुकी है। इस समममत क माध्यम स हमने न कवल कई
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              प्रमतभाओं को सामने लाया है, बमल्क हमने अपने क्षत्र की सांस्कृमतक पहचान
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              को भी मजबूत मकया है। यह संस्था हमार मलए एक जीमवत प्रमाण है मक जब
              सच्चे मदल स कोई अच्छा काम करने का संकल्प मलया जाता है, तो वह हमेशा
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              सफल होता है।
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