Page 119 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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यह तय मकया मक हम टोंक खुदष को एक बहतर जगह बनाने क मलए हर संभव
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प्रयास करगे।
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रोटरी क्लब क माध्यम से हमने अनेक सेवा कायष मकए। हमने स्वास्थ्य
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मशमवरों का आयोजन मकया, जहााँ गरीबों और ज़ऱूरतमंदों को मुफ्त म स्वास्थ्य
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सुमवधाए ममलीं। हमने मशक्षा क क्षत्र म भी काम मकया, गरीब बच्चों को स्कूल
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की मकताबें और अन्य सामग्री मवतररत की। इसक अलावा, हमने पयाषवरण
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संरक्षण क मलए भी कई पहल की, जस वृक्षारोपण कायषक्रम। इन सभी कायों को
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करत हुए हम यह एहसास हुआ मक समाज सवा म जो आत्म-संतुमि ममलती है,
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वह मकसी और काम में नहीं ममल सकती।
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अध्यक्ष क ऱूप में, मने यह सुमनमित करने की कोमशश की मक हमारा
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क्लब कवल नाम का न रहे, बमल्क सच में समाज में एक सकारात्मक बदलाव
लाए। मर सामथयों का सहयोग और उनका समपषण मर मलए एक बहुत बडी
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ताकत थी। उनका उत्साह देखकर मुझ और भी ज़्यादा ऊजाष ममलती थी। रोटरी
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क्लब टोंक खुदष क साथ मबताया गया वह समय मर जीवन का सबस संतोर्जनक
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समय था।
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आज जब म पीछ मुडकर देखता ह ाँ, तो मुझ यह एहसास होता है मक
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रोटरी क्लब ने मुझ मसफ एक पद नहीं मदया, बमल्क समाज सेवा करने का एक
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मंच भी मदया। इस अनुभव ने मर अंदर सामामजक कायष करने क जुनून को और
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भी मजबूत कर मदया। यह मर मलए एक महत्वपूण सीख थी मक जीवन म हम ें
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मसफ अपने मलए नहीं, बमल्क दूसरों क मलए भी जीना चामहए।
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