Page 122 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
मशवम कला सामहत्य एवं सांस्कृमतक समममत का गठन
(मदनांक 09 जनवरी, 2009)
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रोटरी क्लब टोंक खुदष म समाज सवा क कायों ने मर और मर सामथयों
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क मन म एक गहरा प्रभाव छोडा था। हमने महसूस मकया था मक समाज क मलए
कुछ करना कवल एक शौक
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नहीं, बमल्क एक मजम्मेदारी है।
रोटरी क्लब क माध्यम से मकए
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गए सवा कायष हम बहुत संतुमि
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देते थे, लेमकन हमें यह भी
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एहसास हुआ मक समाज क
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सांस्कृमतक और सामहमत्यक उत्थान क मलए एक अमधक कमित और स्थायी मंच
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की आवश्यकता है। एक ऐसा मंच, जो कला, सामहत्य और संस्कृमत क माध्यम
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स ग्रामीण अंचल को एक नई पहचान दे सक। इसी भावना स प्रेररत होकर, हमने
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एक स्वयंसवी संस्था (NGO) क गठन का मनणषय मलया।
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तदुपरांत, मदनांक 09 जनवरी, 2009 को, मने अपने कुछ सममपषत और
हम मवचारों वाले सामथयों क साथ ममलकर एक बैठक की। इस बैठक में मेर साथ
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श्री सुरि सधव, श्री राज भंवर मसंह ठाक ु र, श्रीमती साधना चौहान, श्री लक्ष्मण
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प्रसाद शमाष, और श्री रमव चतुवेदी जस अनुभवी और उत्साही व्यमि मौजूद थे।
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हम सबने ममलकर एक ऐसी संस्था बनाने का मवचार मकया, जो न कवल समाज
सेवा कर, बमल्क कला और संस्कृमत को भी बढावा दे। हमारी चचाष का मुख्य
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मवर्य यही था मक कस हम अपने क्षत्र की समृद् सांस्कृमतक मवरासत को संरमक्षत
और प्रोत्सामहत कर सकते हैं।
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