Page 120 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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एक गौरवपूणष अध्याय: इग्नू स्टडी सटर
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मर जीवन का सबस संतोर्जनक और गवपूण अध्याय तब शुऱू हुआ
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जब मने यह महसूस मकया मक मरा मशक्षण संस्थान कवल तकनीकी मशक्षा तक
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ही सीममत नहीं है, बमल्क यह हमार युवाओं क सपनों को साकार करने का एक
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माध्यम बन रहा है। इसी भावना क साथ, मुझ बहुत खुशी और सुकून ममला जब
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वर् 2008 में मैंने अपने मशवम इंस्टीट्यूट में इंमदरा गांधी राष्रीय मुि
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मवश्वमवनॏयालय
(इग्नू), भोपाल
का एक स्टडी
सेंटर खोला।
इस
सेंटर को
खोलने का
हमारा मुख्य उद्देश्य उन युवाओं को एक अवसर देना था जो मशक्षक बनना चाहत े
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थे, लमकन उनक पास इसक मलए आवश्यक योग्यता नहीं थी। हमने इग्नू क
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माध्यम स एक मवशर् कोस शुऱू मकया, मजसका नाम था Diploma in
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Elementary Education (D.El.Ed)। यह कोस उन सभी युवाओं क मलए
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एक वरदान की तरह था जो अपनी लगन और मेहनत से मशक्षक बनने का सपना
देखते थे।
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इस कोस की शुरुआत म ही हम अपार सफलता ममली। लगभग 100
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से 200 छात्रों ने हमार सटर म प्रवश मलया। हमार मलए यह बहुत बडा गव का
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क्षण था, क्योंमक यह हमार संस्थान क प्रमत उनक मवश्वास का प्रमाण था। इग्नू की
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यह मान्यता हमें मसफ दो सत्रों क मलए ही ममली थी—सत्र 2008-2009 और
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