Page 125 - आनंद से अनार तक
P. 125

े
                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                                                                    ष
                                                     ें
                        ें
                           ै
                     सुरि सन्धव का व्यमित्व कई मायनों म अनूठा है। वह मसर्फ एक युवा
              नहीं, बमल्क एक सामहत्यकार, एक युवा गीतकार और एक अच्छ कमव भी हैं।
                                                                  े
                                                       े
                           ाँ
                                                                            े
              उनकी कमवताए और गीत सुनकर मर मन को हमशा शांमत ममलती है। उनक
                                            े
                                            े
                                                    े
                                                      े
              मवचारों में एक ऐसी गहराई है जो हमें एक-दूसर स और भी ज़्यादा जोडती है।
                                                             े
                                                        े
                                                          ै
                    ैं
                                                                े
                                                                           ें
              जहााँ म अपनी ज़मीनी सच्चाई और अपने अनुभव स फसल लता ह ाँ, वहीं सुरि
                                               े
              अपनी युवा सोच और रचनात्मक ऊजाष स मर मवचारों को एक नई मदशा देत हैं।
                                                                          े
                                                  े
                                                 े
                                                                   े
                                    े
              यही कारण है मक वह मुझस छोट होने क बावजूद, मेर सबसे अच्छ सलाहकार
                                              े
                                                         े
                                        े
              बन गए।
                     एक बार की बात है, जब हम मशवम कला सामहत्य एवं सांस्कृमतक
              समममत क मलए एक बडा कायषक्रम आयोमजत करने की सोच रहे थे। हमार पास
                     े
                                                                        े
              योजना तो थी, लेमकन कायषक्रम को भव्य और प्रभावशाली बनाने क मलए हमें
                                                                    े
                                                                       ैं
                                                   ै
                                                                           ें
                                ैं
                                                     े
              कुछ नया करना था। म थोडा मचंमतत था मक कस यह सब होगा। तभी मने सुरि
                                                                      े
                                                            े
                      े
                ै
              सन्धव  स सलाह ली। उन्होंने मुझस कहा, "सर  (वह मुझ इसी नाम स पुकारत  े
                                           े
              हैं), आप मचंता मत कीमजए। हम इस कायषक्रम को मसर्फ एक सभा नहीं, बमल्क
                                                          ष
                                                          े
              एक ऐसा सामहमत्यक और सांस्कृमतक उत्सव बना देंग, मजसकी ममसाल लोग
              दें।"
                                                                          ै
                     सुरि सन्धव   ने पूरी योजना बनाई। उन्होंने कायषक्रम की ऱूपरखा तयार
                        ें
                           ै
                                                                     े
              की, स्थानीय कमवयों और कलाकारों को आमंमत्रत मकया, और एक ऐसा माहौल
                                                   े
              बनाया जहााँ हर कोई अपनी प्रमतभा मदखा सक। उन्होंने कायषक्रम क मलए गीत
                                                                    े
              और कमवताएाँ भी मलखीं, जो वहााँ मौजूद सभी लोगों क मदल को छू गई ं । उस
                                                           े
              मदन मुझ एहसास हुआ मक सुरि सन्धव  मसर्फ एक सहयोगी नहीं, बमल्क मेर  े
                                           ै
                                       ें
                                                   ष
                     े
                                                                   े
                               ें
              सपनों को पूरा करने म एक समक्रय भागीदार हैं। वह अपनी ऊजाष स मर हर काम
                                                                     े
                                                                    े
              में एक नया जीवन भर देते हैं।
              115 | P a g e
   120   121   122   123   124   125   126   127   128   129   130