Page 130 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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              अलावा कुछ नहीं चलात थे, लेमकन इस हादसे ने उन्हें यह एहसास करा मदया
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              था मक जीवन मकतना अमनमित है। उनकी यह इच्छा उनकी महम्मत और उनक
              आत्ममवश्वास का प्रतीक थी। मने तुरंत उनकी इच्छा पूरी करने का फसला मकया।
                                      ैं
                                                                  ै
              मने इंदौर स ही एक सक ं ड हैंड मारुमत सुजुकी 800 गाडी खरीदी और उन्हें घर
               ैं
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              ले आया।
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                     यह घटना मर जीवन का एक ऐसा यादगार अनुभव है, मजसे मैं कभी
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              नहीं भूल सकता। यह मसर्फ एक भयानक हादस की कहानी नहीं, बमल्क यह
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              हमार पररवार क अटूट प्रेम, मवश्वास और एकता की कहानी है। इस घटना ने हमें
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              मसखाया मक जब हम सब एक साथ होते हैं, तो हम मकसी भी चुनौती का सामना
              कर सकत हैं। यह कहानी डॉ. वमाष की कामबमलयत और मर भाई की अटूट
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              इच्छाशमि का भी एक प्रमाण है। लेमकन सबसे बढकर, यह कहानी हमार पररवार
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              क मलए यह सबक लेकर आई मक एक-दूसर का साथ और प्रेम ही जीवन की
              सबसे बडी दौलत है।




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