Page 135 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
एक मशक्षक का हृदय: जब सवा और कतषव्य एक हुए
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जीवन क कुछ फसल ऐस होत हैं जो कवल हमारी मदशा ही नहीं
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बदलते, बमल्क हमार भीतर क इंसान को भी पररभामर्त करत हैं। मर कररयर म ें
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भी एक ऐसा ही पडाव आया था, मजसने मुझ यह एहसास कराया मक एक मशक्षक
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क मलए उसका कतव्य और उसका मदल दोनों मकतने महत्वपूण होत हैं। यह
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कहानी है मेरी पदोन्नमत की, एक नई जगह पर स्थानांतरण की, और एक ऐसे
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फसले की, मजसने मुझ सुकून और आत्म-संतुमि दी।
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जनपद मशक्षा कि, टोंक खुदष म मरा BAC क पद पर कायष करने का
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सफर 15 माचष, 2016 को समाप्त हो गया। मर अंदर एक मममश्रत भावना थी—
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एक तरर्फ नई मज़म्मदारी की खुशी
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थी, तो दूसरी तरर्फ उस टीम को
छोडने का दुुःख था मजसक साथ
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मने बहुत कुछ सीखा था। 16 माचष,
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2016 को मुझ एक और खुशी
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ममली। मेरा प्रमोशन उच्च माध्यममक मशक्षक (अथषशास्त्) क पद पर देवास
मवकासखंड क शासकीय उच्चतर माध्यममक मवनॏयालय, पटाडी में हो गया। यह
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मर मलए एक बडी उपलमब्ध थी और म इस नई भूममका क मलए बहुत उत्सामहत
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था।
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मर मलए यह एक महत्वपूण मदन था, और मुझ लगा मक इस खुशी को
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मुझ अपने अजीज दोस्तों क साथ मनाना चामहए। मने अपने दो सबस अच्छ े
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दोस्तों, राज भंवर मसंह ठाक ु र और सोहन क ु मार भैसमनया, स अपनी खुशी साझा
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की। व दोनों मर साथ मरी इस नई यात्रा म शाममल होने क मलए तुरंत तयार हो
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