Page 140 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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मवशुद् ऱूप स प्रशासमनक पोस्ट थी, जो मर मलए मबल्कु ल नई थी। म एक मशक्षक
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था, मजस कागज़ी कारवाई और प्रशासमनक कायष का ज़्यादा अनुभव नहीं था।
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लमकन मने इस चुनौती को स्वीकार मकया और अपने काम म जुट गया।
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शुरुआत म, मुझ थोडी घबराहट हुई। मर सामने बहुत सार नए काम थे
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मजन्हें मैंने पहले कभी नहीं मकया था। लेमकन मेर सौभाग्य से, मुझ एक अद्भुत
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टीम का साथ
ममला। मजला
मशक्षा
अमधकारी
कायाषलय,
देवास क बाबू
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श्री हररओम
मतवारी जी, श्री
राहुल मनलोत्स जी, श्री क ु नाल बुंदेला जी, श्री लोकश दुब जी, और श्री माखन
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मशंदे जी का सहयोग मर मलए मकसी वरदान स कम नहीं था। इन लोगों ने मुझ हर
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कदम पर मदद की। उन्होंने मुझ मसखाया मक एक सरकारी दफ्तर म काम कस े
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होता है। उन्होंने मुझ यह मसखाया मक कोई पत्र कस बनाया जाता है, मकसी पत्र
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का जवाब कसे मलखा जाता है, और प्रशासमनक कायों को कस कुशलता स े
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संभाला जाता है। ये सब मर मलए मबल्कुल नए अनुभव थे, लेमकन उनकी मदद
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स मने बहुत कम समय म ही सार कायष सीख मलए। मुझ याद है, म घंटों उनक
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साथ बठकर काम सीखता था। व मर हर सवाल का जवाब धैयषपूवक देत थे।
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उनकी मदद से, म जल्द ही इस नई भूममका म सहज हो गया।
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