Page 141 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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                                                           ैं
                                  े
                                                                े
                     इस एक साल क दौरान, मने बहुत कुछ सीखा। मने न कवल प्रशासमनक
                                          ैं
              कायष करना सीखा, बमल्क मैंने यह भी सीखा मक एक अमधकारी क ऱूप में कसे
                                                                  े
                                                                          ै
              सोचना चामहए। मैंने मशक्षकों क प्रमशक्षण कायषक्रम आयोमजत मकए, मजसम मुझ  े
                                      े
                                                                         ें
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              पूर मजल क मशक्षकों स ममलने और उनक साथ बातचीत करने का मौका ममला।
               ैं
              मने स्कूलों और होस्टलों का मनरीक्षण मकया, और वहााँ की मस्थमतयों को करीब
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              स समझा। यह मर मलए एक बहुत ही सीखने वाला अनुभव था। म अपने काम
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                                                                   ैं
              म पूरी तरह स डूब गया था, और मुझ यह एहसास हुआ मक म इस काम को बहुत
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               ें
              अच्छ स कर रहा ह ाँ। मर मलए यह समय मर पेशवर जीवन का एक महत्वपूण  ष
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              महस्सा बन गया था।
                     लेमकन जीवन में पररवतषन आता रहता है। 17 माचष, 2017 को, श्री
              राजेंि खत्री जी का तबादला हो गया और उनक स्थान पर नए मजला मशक्षा
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              अमधकारी श्री कवट सर की मनयुमि हुई। हमने उनक सामनध्य म भी काम करना
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                                                                ें
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              शुऱू मकया। श्री कवट सर एक अच्छ और ईमानदार अमधकारी थे, लेमकन उनका
              कायषकाल ज़्यादा मदनों तक नहीं रहा। हम लगा मक अब सब कु छ मफर स सामान्य
                                                                      े
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              हो जाएगा, लमकन मकस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
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                     15 फरवरी, 2018 को, एक और नए मजला मशक्षा अमधकारी की
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              मनयुमि हुई—श्री राजीव सूयषवंशी जी। वे एक नए अमधकारी थे और उनक साथ
              उनकी एक नई टीम भी आई। उनका काम करने का तरीका मबल्कुल अलग था।
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              उनक आते ही, मजला मशक्षा अमधकारी कायाषलय, देवास में एक बड बदलाव
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              का दौर शुऱू हो गया। कुछ ही मदनों म, उन्होंने और उनकी नई टीम ने कायाषलय
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              क बहुत सार अमधकाररयों, बाबुओं, और मुझ, जो ADPC क पद पर था,
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              कायषमुि कर मदया। मुझ और मरी टीम क सदस्यों को अलग-अलग शाखाओं
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              म भज मदया गया। मुझ योजना शाखा में भेजा गया।
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