Page 146 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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इस घटना क बाद, 14 माचष, 2018 को मेरा अटचमेंट मवकासखंड
मशक्षा अमधकारी कायाषलय, टोंक खुदष में सहायक मवकासखंड अमधकारी क पद
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पर कर मदया गया। मर मलए यह एक नई शुरुआत थी। म मनदोर् सामबत हुआ
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और उस व्यमि का र्ड्यंत्र नाकाम रहा। मुझ यह एहसास हुआ मक चाहे मकतनी
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भी परशामनयााँ क्यों न हों, अगर हम सही मागष पर चलते हैं, तो हमें डरने की
ज़ऱूरत नहीं है।
आज जब म उस समय को याद करता ह ाँ, तो मुझ यह एहसास होता है
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मक हर अनुभव, चाहे वह अच्छा हो या बुरा, हम कुछ न कुछ मसखाता है। मरा
ADPC का कायषकाल भले ही छोटा था, लमकन इसने मुझ यह मसखाया मक
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प्रशासमनक पद पर काम करने की क्या चुनौमतयााँ होती हैं और कस उनस मनपटा
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जाता है। लेमकन सबसे बडा सबक यह था मक ईमानदारी और सच्चाई हमेशा
जीतती है, और जब हम सही होते हैं, तो हमें कोई भी हरा नहीं सकता।
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मैं इस आत्मकथा क माध्यम से उन सभी लोगों का हृदय से आभार
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व्यि करना चाहता ह ाँ मजन्होंने मर इस सफर को आसान बनाया। खासकर,
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श्रीमती कामना आचायष जी, मजन्होंने मुझ पर मवश्वास मकया और मुझ इस
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मुमश्कल स बाहर मनकाला। उनका योगदान मर मलए एक प्रेरणा है। म श्री अमनल
सोलंकी, श्री हररओम मतवारी, और श्री राहुल मनलोत्स का भी आभारी ह ाँ,
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मजन्होंने मेर साथ एक सच्चे ममत्र और सहयोगी की तरह खड रहे। मेर जीवन की
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यह कहानी मुझ हमशा याद मदलाती रहेगी मक ईमानदारी ही सबस बडी पूंजी है।
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