Page 150 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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यह एक सबक था। इस घटना ने मुझ मसखाया मक जीवन म हर मोड पर संघर् ष
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होता है, और हम हमशा अपने मूल्यों पर कायम रहना चामहए। मने यह भी सीखा
मक अगर कोई आपकी ईमानदारी से जलता है, तो आपको उससे लडना नहीं
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चामहए, बमल्क उसस दूर चल जाना चामहए।
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आज भी, जब म उन मदनों को याद करता ह ाँ, तो मुझ यह एहसास होता
है मक हर अनुभव, चाहे वह कडवा हो या मीठा, हम कुछ न कुछ मसखाता है। मर े
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मलए यह एक ऐसा अध्याय था मजसने मुझ यह मसखाया मक अपने आत्म-सम्मान
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और मानमसक शांमत को कभी भी दााँव पर नहीं लगाना चामहए। म श्री सज्जन
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मसंह वमाष जी का हृदय स आभारी ह ाँ मजन्होंने मरी मदद की और मुझ एक नया
अवसर मदया। उनकी वजह से मेरा यह सफर आसान हो गया।
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मानमसक शांमत और सही मनणषय पर
"कायषस्थल कवल काम करने की जगह नहीं, बमल्क मानमसक शांमत
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का कि होना चामहए। जहााँ नकारात्मकता आपक जुनून को दबाने
लगे, वहााँ से हट जाना ही समझदारी है।"
सहयोग और कृतज्ञता पर
"सज्जन मसंह वमाष जी का वह सहयोग कवल एक पत्र नहीं था,
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बमल्क सत्य और ईमानदारी क पक्ष म खडा एक अटूट मवश्वास था।"
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