Page 147 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

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                                 एक नया अध्याय: अटचमेंट और संघर्ष

                     जीवन का हर मोड एक नया सबक लेकर आता है। मेर पेशेवर सफर में
                                                                े
              भी एक ऐसा ही पडाव आया था, मजसने मुझ यह एहसास कराया मक कायषस्थल
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              पर मसर्फ काम ही नहीं, बमल्क वहााँ का माहौल और लोगों क बीच क संबंध भी
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              बहुत महत्वपूण होत हैं। यह कहानी मर उस समय की है जब 14 माचष, 2018
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              को  मुझ  मवकासखंड  मशक्षा  अमधकारी  कायाषलय,  टोंक  खुदष  में  सहायक
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              मवकासखंड अमधकारी क पद पर कायषभार संभालने का मौका ममला था।
                     एक नई शुरुआत और एक पुराना जुनून
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                     ADPC क पद स योजना शाखा म स्थानांतरण और मफर वहााँ की
                                                                            े
                                                              कडवी  यादों  क
                                                                     े
                                                              बाद, मेर मलए यह
                                                              एक  नई  शुरुआत
                                                              थी।  मैं  इस  नए
                                                              अवसर  को  लेकर

                                                              बहुत  उत्सामहत
                                                              था।  मुझ  मफर  स  े
                                                                     े
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              प्रशासमनक कायष करने का मौका ममल रहा था। मने पूर उत्साह और ईमानदारी
              क साथ अपना काम शुऱू कर मदया। मरा काम था स्कू लों का मनरीक्षण करना,
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              मीमटंग म भाग लना, और प्रशासमनक कायों को व्यवमस्थत ऱूप स संभालना।
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              मने अपने काम म पूरी तरह स खुद को सममपषत कर मदया। मुझ लगता था मक
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              अगर मैं ईमानदारी से काम कऱूगा, तो सब कुछ ठीक रहेगा। मुझ यह भी एहसास
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              हुआ मक यह पद मुझ मशक्षा व्यवस्था को और बहतर तरीक स समझने का मौका
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              दे रहा था।
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