Page 149 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
एक नया रास्ता और एक बडा फसला
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मने बहुत सोचा और आमखरकार यह फसला मकया मक मुझ इस जगह
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से मनकलना होगा। मैं एक ऐसी जगह काम करना चाहता था जहााँ मेर काम की
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सराहना हो और मुझ सकारात्मक माहौल ममल। मने यह फसला मकया मक म इस
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व्यमि की ईष्याष की वजह से अपनी ईमानदारी और अपनी मेहनत को बबाषद नहीं
कर सकता। मने तुरंत इस मामल को गंभीरता स मलया और यह तय मकया मक
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अब मुझ एक नई जगह पर जाना है।
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मर कुछ करीबी ममत्रों ने मुझ सलाह दी मक म मकसी बड व्यमि स े
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ममलकर अपनी बात रखू। मुझ याद आया मक हमार क्षत्र क एक बहुत ही
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प्रभावशाली और सम्मामनत नेता श्री सज्जन मसंह वमाष जी, जो उस समय कांग्रेस
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सरकार म मंत्री थे, मर काम को जानत और पसंद करत थे। मने मबना देरी मकए
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उनस संपक मकया और उन्हें अपनी पूरी मस्थमत बताई। उन्होंने मरी बात को बहुत
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ध्यान स सुना और तुरंत एक पत्र मलखकर मरी मदद की।
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यह 15 जून, 2018 का मदन था जब उनक पत्र क माध्यम से मेरा
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अटचमट मवकासखंड मशक्षा अमधकारी कायाषलय स टोंक खुदष क ही उत्कृि
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मवनॏयालय म हो गया। यह मर मलए एक बहुत बडी राहत थी। मुझ लगा मक मने
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एक बहुत बड बोझ स मुमि पा ली है। मुझ एक ऐसी जगह काम करने का मौका
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ममल रहा था जहााँ मैं सकारात्मक ऊजाष क साथ अपने काम को आगे बढा सकता
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था।
एक नई शुरुआत और एक स्थायी सबक
उत्कृि मवनॏयालय म जॉइमनंग करने क बाद, मुझ एक नई ऊजाष का
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एहसास हुआ। वहााँ का माहौल बहुत ही सकारात्मक और प्रेरणादायक था। मुझ े
अपने काम म बहुत खुशी ममली। मर मलए यह मसर्फ एक रांसफर नहीं था, बमल्क
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