Page 154 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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मुझ यहााँ हर मदन एक नई प्रेरणा ममलती है। मरा यह सफर मुझ यह मसखाता है
मक हमें कभी भी हार नहीं माननी चामहए, और अगर हम सच्चे मदल से अपने
काम को करना चाहते हैं, तो हमें हमेशा सही रास्ता ममल ही जाता है।
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यह कहानी मसर्फ एक रांसफर की नहीं है, बमल्क यह मर दृढ संकल्प,
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मरी ईमानदारी और मर उन मूल्यों की कहानी है जो मुझ एक मशक्षक बनात हैं।
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मुझ खुशी है मक मने उस समय सही फसला मलया और आज म अपने काम स े
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पूरी तरह संतुि ह ाँ।
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मशक्षक क आत्मसम्मान और 'धमष' पर
"एक मशक्षक क मलए पद और प्रमतष्ठा से बढकर 'पढाने का अवसर' होता
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है; जहााँ छात्र न हों, वह स्थान मशक्षक क मलए मरुस्थल क समान है।"
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"वेतन तो कवल आजीमवका चलाता है, लेमकन एक मशक्षक की आत्मा
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को संतोर् तभी ममलता है जब उसकी कक्षा छात्रों की मजज्ञासा स भरी हो।"
सही मनणषय और बदलाव क साहस पर
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"जब माहौल मनरुत्सामहत करने लगे और पद बोझ बन जाए, तब अपनी
राह बदल लेना ही प्रगमत की ओर पहला कदम होता है।"
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