Page 158 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
पीएचडी का अगला पडाव: मसनोमप्सस और आरडीसी
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मशक्षा का हर पडाव एक नई चुनौती लकर आता है, और मेर जीवन में
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भी पीएचडी का सफर ऐसा ही रहा। व्यमिगत साक्षात्कार में चयन होने क बाद,
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मुझ लगा मक अब मरा सफर आसान हो जाएगा, लमकन यह तो मसर्फ शुरुआत
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थी। यह कहानी है उस संघर् की जब एक मशक्षक को एक शोधाथी म बदलना
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पडा और एक ररसचष प्रपोजल तयार करने की चुनौती का सामना करना पडा।
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एक नई चुनौती: कोस वक की पढाई
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10 अप्रैल, 2015 को रवींिनाथ टगोर मवश्वमवनॏयालय में व्यमिगत
साक्षात्कार
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(पसनल इंटरव्यू)
क बाद, मुझ े
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पीएचडी क मलए
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चुन मलया गया
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था। यह मेर मलए
एक बहुत बडी
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उपलमब्ध थी, लमकन मुझ पता था मक अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है।
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पीएचडी की प्रमक्रया का अगला चरण था छह महीने का कोसष वक। यह कोसष
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शोध क मसद्ांतों, कायषप्रणाली और तकनीकों को समझने क मलए बहुत
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महत्वपूण था। म पूरी ईमानदारी और लगन स इस कोस की पढाई म जुट गया।
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मने कक्षाओं म मनयममत ऱूप स भाग मलया, नोट्स बनाए, और मशक्षकों
स अपने संदेह दूर मकए। मर मशक्षक भी बहुत सहयोगी थे और उन्होंने मुझ हर
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कदम पर मागषदशषन मदया। छह महीने बाद, कोस वक की परीक्षा हुई। मने अपनी
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महनत स अच्छ अंक हामसल मकए और यह सामबत कर मदया मक एक मशक्षक
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