Page 161 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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नया अध्याय: "भारत क दरस्थ ग्रामीण अंचल म मशक्षा का
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प्रचार-पसार करना"
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मर जीवन की मकताब म अब एक नया अध्याय जुड गया था, एक ऐसा
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अध्याय जो मेर सपनों की गहराई और ग्रामीण भारत क प्रमत मेर प्रेम को दशाषता
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था। पीएचडी की मडग्री हामसल करने का मेरा सपना मसर्फ एक व्यमिगत लक्ष्य
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नहीं था, बमल्क यह मेर गााँव, मेर पररवार और मेर सभी मशक्षकों का सपना था,
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मजन्होंने मुझ इस कामबल बनाया था। मेर पीएचडी मसनोमप्सस का मवर्य था,
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"भारत क दूरस्थ ग्रामीण अंचल म मशक्षा का प्रचार-पसार करना" । यह मवर्य
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मर मदल क बहुत करीब था, क्योंमक यह मर अपने जीवन क अनुभवों स जुडा
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हुआ था ।
शोध की शुरुआत: सपनों का बीज
मेरी पीएचडी यात्रा 2016 स शुऱू हुई । जब मैं रवींिनाथ टगोर
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मवश्वमवनॏयालय, भोपाल म अपनी पीएचडी क मलए चुना गया था, तो मुझ लगा
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मक मेरा सफर आसान हो जाएगा, लमकन यह तो मसर्फ शुरुआत थी । एक
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शोधाथी क ऱूप में मेरा पहला कदम था अपने शोध मवर्य पर गहन मसनोमप्सस
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तैयार करना । मैंने अपने मवर्य की ऱूपरखा तैयार की: ग्रामीण मशक्षा की
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समस्याओं, इसक उद्देश्य और शोध पद्मत । यह मर मलए एक बडी चुनौती थी,
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लेमकन मैं तैयार था। मैंने मदन-रात एक कर मदया, मकताबें पढीं, इंटरनेट पर शोध
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पत्र खोज, और कई मवशेर्ज्ञों से सलाह ली । मैं चाहता था मक मेरा शोध मसर्फ
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एक अकादममक कायष न हो, बमल्क यह मर व्यमिगत अनुभवों स जुडकर ग्रामीण
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भारत में मशक्षा की मस्थमत को बेहतर बनाने का समाधान दे ।
कमठन पररश्रम और दृढ संकल्प
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