Page 160 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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• उद्देश्य: मने स्पि मकया मक मरा शोध मकन समस्याओं का समाधान
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करना चाहता है।
• शोध पद्मत: मैंने यह बताया मक मैं मकस प्रकार क डटा का उपयोग
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कऱूगा और मेरा शोध कायष कसे आगे बढेगा।
मैंने कई बार मसनोमप्सस में बदलाव मकए और उसे और बेहतर बनाने की कोमशश
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की। मर अंदर एक ही लक्ष्य था: आरडीसी म सफल होना।
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मनष्कर्ष: एक नई पहचान
मरा संघर् आमखरकार रंग लाया। मने अपनी मसनोमप्सस तयार की और
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उस ररसचष मडग्री कमटी क सामने प्रस्तुत मकया। प्रस्तुमत क दौरान मने पूर े
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आत्ममवश्वास क साथ अपने शोध क बार में बताया और समममत क सवालों का
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जवाब मदया। मुझ पता था मक यह मर जीवन का एक बहुत ही महत्वपूण क्षण
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था। मेरी मेहनत और मेर आत्ममवश्वास ने समममत को प्रभामवत मकया, और उन्होंने
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मेर मसनोमप्सस को स्वीकार कर मलया।
यह मर मलए मसर्फ एक मसनोमप्सस की स्वीकृमत नहीं थी, बमल्क यह
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मरी एक नई पहचान का आरंभ था—एक मशक्षक से एक शोधाथी बनने का
सफर। इस अनुभव ने मुझ मसखाया मक जीवन म सफलता पाने क मलए मसर्फ
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ज्ञान ही काफी नहीं, बमल्क समपषण, कडी महनत और आत्ममवश्वास भी बहुत
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ज़ऱूरी हैं।
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