Page 155 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                     पीएचडी प्रवेश: एक सपना जो हकीकत में बदला


                                                                       ें
                     जीवन म कुछ लक्ष्य ऐस होत हैं मजन्हें हम वर्ों स अपने मन म संजोए
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                                                            े
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              रखते हैं, और जब उन्हें हामसल करने का मौका ममलता है, तो मदल में एक अजीब
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              सी हलचल और उत्साह महसूस होता है। मर मलए, पीएचडी करने का सपना
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              ऐसा ही था। यह कहानी मेर उस सफर की है जब एक सरकारी मशक्षक से एक
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              शोधाथी बनने का सफर शुऱू हुआ, और यह सफर आसान नहीं था, बमल्क
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              संघर्ों, तनावों और अंत म अपार खुशी स भरा हुआ था।
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              एक नया लक्ष्य और बढता हुआ तनाव
                     बात उन मदनों की है जब मैं माध्यममक मवनॏयालय, गोरवा में पदस्थ था।

              मुझ  आज  भी  वह  मदन  याद  है—15  फरवरी  2015।  मैंने  रवींिनाथ  टगोर
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              मवश्वमवनॏयालय, भोपाल में पीएचडी प्रवेश परीक्षा क मलए आवेदन कर मदया था।
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              यह एक ऐसा फसला था मजसने मेर जीवन में एक नई उम्मीद भर दी थी। मेर मदल
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              म एक सपना था मक म न कवल एक मशक्षक बनू, बमल्क मशक्षा क क्षेत्र में अपना
              योगदान भी दूाँ।
                     जैसे-जैसे परीक्षा की तारीख नज़दीक आती गई, मेरा तनाव बढता गया।
              मेर पास पढाने की मज़म्मेदारी थी, पररवार की मज़म्मेदारी थी, और इन सबक बीच
                                                                        े
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              पढाई क मलए समय मनकालना एक बडी चुनौती थी। कभी-कभी मैं मनराश हो
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              जाता था और सोचता था मक क्या मैं यह कर पाऊगा? लेमकन मफर मेर भीतर की
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              आवाज़ कहती थी, "तुम महम्मत मत हारो।" मर पररवार और दोस्तों ने भी मुझ  े
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              बहुत प्रेररत मकया। मने अपने आप को समझाया मक यह मर मलए एक अवसर
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              है, और म इस हाथ स जाने नहीं दूाँगा।
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              परीक्षा का मदन: धडकनों से भरा एक सफर
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