Page 152 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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                     यह कवल छात्रों की कमी का मामला नहीं था। मवनॏयालय का स्टाफ भी
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              इतना अच्छा नहीं था मक म उनक साथ सहज महसूस कर सकू। वहााँ एक
                                      ैं
                                                                   ाँ
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              सकारात्मक और सहयोगपूण माहौल की कमी थी, जो मकसी भी कायषस्थल क
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                                                                         ैं
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              मलए बहुत ज़ऱूरी है। मर मन म एक अजीब सी बचैनी थी। मुझ लगा मक म एक
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              ऐसी जगह पर ह ाँ जहााँ म अपने काम को पूरी तरह स नहीं कर पा रहा ह ाँ। एक
              मशक्षक क मलए इसस बडा दुुःख और क्या हो सकता है मक उस पढाने का अवसर
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              न ममल? मेरा मदल हमेशा छात्रों क मलए धडकता है, और वहााँ मैं अपने मदल की
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              आवाज़ को सुन ही नहीं पा रहा था। मने महसूस मकया मक म इस तनावपूण और
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              मनरुत्सामहत करने वाल माहौल म काम नहीं कर सकता। मरी मानमसक शांमत
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                                                              े
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              और मर काम की गुणवत्ता दोनों ही प्रभामवत हो रहे थे।
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                     एक उम्मीद की मकरण और एक बडा फसला
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                     मने बहुत सोचा और आमखरकार यह फसला मकया मक मुझ इस जगह
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              से मनकलना होगा। मैं एक ऐसी जगह काम करना चाहता था जहााँ मेर काम की
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              सराहना हो, जहााँ मुझ छात्रों को पढाने का पूरा मौका ममल और जहााँ मुझ एक
              सकारात्मक माहौल ममले। मेरी मकस्मत ने मेरा साथ मदया। उस समय, प्रदेश में
              कांग्रेस की सरकार थी, और उन्होंने एक ऑनलाइन रांसफर पॉमलसी चालू की
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              थी। मर मलए यह मकसी वरदान स कम नहीं था। मुझ लगा मक यह मर मलए एक
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              अवसर है अपनी राह बदलने का।
                     मने मबना देरी मकए ऑनलाइन आवदन मकया। मने दो स्कूलों का चयन
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              मकया, जहााँ अथषशास्त् क पद खाली थे। मेरा पहला चयन था शासकीय कन्या
              उच्चतर माध्यममक मवनॏयालय, टोंक खुदष, और दूसरा था शासकीय उच्चतर
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              माध्यममक मवनॏयालय, देवली। मने ये दोनों स्कूल इसमलए चुने क्योंमक म टोंक
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