Page 153 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

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                                                      ें
              खुदष म ही रहना चाहता था और इन दोनों स्कूलों म छात्रों की संख्या भी अच्छी
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              थी। मुझ पता था मक इन स्कूलों म मुझ पढाने का पूरा मौका ममलगा।
                     मैंने अपने ऑनलाइन आवेदन को जमा कर मदया और पररणाम का
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              इंतज़ार करने लगा। मर मदल म एक उम्मीद थी मक इस बार सब ठीक होगा। मुझ  े
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              अपने फसल पर पूरा भरोसा था, और मुझ यह भी पता था मक अगर मुझ अपनी
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              इच्छा क अनुसार जगह ममल गई, तो म वहााँ पूरी ईमानदारी और महनत स काम
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              कऱूगा।
                     संतुमि और सुक ू न का एहसास
                                                                  े
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                     अंततुः,  मरा  इंतज़ार  खत्म  हुआ।  रांसफर  पॉमलसी  क  तहत,  मेरा
              स्वेमच्छक स्थानांतरण शासकीय कन्या उच्चतर माध्यममक मवनॏयालय, टोंक खुदष
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              में 09 अगस्त, 2018 को हो गया। यह मर मलए एक बहुत बडी राहत थी। मुझ  े
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              लगा मक मने एक बहुत बड बोझ स मुमि पा ली है। मुझ एक ऐसी जगह काम
              करने का मौका ममल रहा था जहााँ मैं सकारात्मक ऊजाष क साथ अपने काम को
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              आगे बढा सकता था।
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                     मर मदल म एक अद्भुत सुक ू न का एहसास हुआ। मुझ लगा मक म अब
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              अपनी असली जगह पर पहुाँच गया ह ाँ। एक ऐसी जगह जहााँ म अपने ज्ञान को
              साझा कर सकता ह ाँ, जहााँ म छात्रों क भमवष्य को संवार सकता ह ाँ, और जहााँ मुझ  े
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              अपने काम का सही सम्मान ममलेगा। मैंने 16 अगस्त, 2018 को शासकीय कन्या
              उच्चतर माध्यममक मवनॏयालय, टोंक खुदष में उच्च माध्यममक मशक्षक (अथषशास्त्)
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              क पद पर कायषभार संभाला।
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                     तब से लेकर आज तक, म इसी मवनॏयालय म पदस्थ ह ाँ। इस मवनॏयालय म  ें
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              काम करक मुझ बहुत खुशी ममली है। यहााँ क छात्र बहुत ही महनती और
              लगनशील हैं, और यहााँ का स्टाफ भी बहुत ही सहयोगी और सकारात्मक है।
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