Page 151 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                      एक मशक्षक का सही मठकाना: जब कररयर ने सही


                                       मोड मलया

                                                                        े
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                     जीवन म कुछ फसल ऐस होत हैं जो हमार रास्त को हमशा क मलए
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              बदल देते हैं, और कभी-कभी तो ये फसल हम वह सुकून और संतुमि देत हैं
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              मजसकी हमें सबसे ज़्यादा तलाश होती है। एक मशक्षक क ऱूप में, मेरा जीवन भी
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                                                                   े
              ऐस कई मोडों स गुजरा। हर मोड पर मने कुछ सीखा, लेमकन मेर कररयर का
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              सबस महत्वपूण मोड तब आया जब मुझ अपनी असली जगह ममली। यह कहानी
              है उस समय की जब मैंने एक ऐसी जगह को छोड मदया जहााँ मैं मसर्फ काम कर
                                                                    ष
              रहा था, और एक ऐसी जगह को अपनाया जहााँ मैं अपने मदल से काम कर पा
              रहा था।
                     एक नई शुरुआत और एक अधूरी तलाश
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                     जनपद मशक्षा कि म सहायक मवकासखंड अमधकारी क पद स, मेरा
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              अटचमेंट 15 जून, 2018 को उत्कृि मवनॏयालय, टोंक खुदष म हुआ। यह एक नया
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                                                                         े
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              अध्याय था, और मने सोचा मक यहााँ म अपने मशक्षण क जुनून को मफर स जी
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              पाऊगा। लेमकन, मर वहााँ पहुाँचने पर, मरी सारी उम्मीदें टूट गई ं । उत्कृि मवनॏयालय
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              होने क बावजूद, वहााँ छात्रों की संख्या बहुत कम थी, और जो छात्र थे भी, वे
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              मनयममत ऱूप स मवनॏयालय नहीं आत थे। यह देखकर मरा मन बहुत दुखी हो गया।
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              म एक मशक्षक ह ाँ, और मेरा धमष है पढाना। मेरा मवर्य अथषशास्त् था, एक ऐसा
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              मवर्य जो छात्रों क भमवष्य क मलए बहुत महत्वपूण है। म छात्रों को पढाना चाहता
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              था, उनस जुडना चाहता था, तामक उन्हें इस मवर्य का महत्व समझा सकू। लमकन
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              जब छात्र ही नहीं थे, तो मैं अपनी लगन और मेहनत को कहााँ लगाता?
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