Page 145 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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                     इसी बीच, मुझ एक उम्मीद की मकरण नज़र आई। म सीधा लोकमशक्षण
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              संचनालय  (DPI),  भोपाल  म  एक  बहुत  ही  प्रभावशाली  और  सम्मामनत
                                       ें
              अमधकारी श्रीमती कामना आचायष जी से ममला, जो उस समय आयुि पद पर

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              थीं। म उनस पहल भी ममल चुका था, और म जानता था मक वह एक बहुत ही
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              ईमानदार और न्यायमप्रय व्यमि हैं। मने उनस अपनी पूरी बात बताई, मेर साथ
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              क्या हुआ, और मर मखलार्फ मकस तरह की झूठी मशकायत दज करवाई गई है।
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                                                                ष
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              मने उन्हें मर िारा मकए गए हर काम का पूरा ब्यौरा मदया।
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                     उन्होंने मरी बात को बहुत ध्यान स सुना। उनक चेहर पर एक ऐसी शांमत
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              थी, मजसने मर मदल को सुकून मदया। उन्होंने कहा, "आप मचंता मत करना। जब
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              तक आपने ईमानदारी से काम मकया है, तब तक हम आपक साथ हैं।" उन्होंने
              मुझ भरोसा मदलाया मक व इस मामल की जााँच करवाएंगी और अगर मुझ मनदोर्
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              पाया गया, तो वह मशकायत को बंद करवा देंगी। उनकी यह बात सुनकर मुझ  े
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              लगा मक जस मर मसर स एक बहुत बडा बोझ हट गया हो। उनका मवश्वास मर  े
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              मलए मकसी भगवान क आशीवाषद से कम नहीं था। उन्होंने अपनी बात पर कायम
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                                                                         े
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              रहत हुए मर मखलार्फ की गई सारी मशकायतों को बंद करवा मदया और मुझ इस
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              मचंता स पूरी तरह मुि कर मदया।
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                     इस मुमश्कल दौर म मुझ कुछ और भी लोगों का साथ ममला, मजनकी
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              मदद को म कभी नहीं भूल सकता। प्राचायष श्री अमनल सोलंकी जी, बाबू श्री
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                                                                  े
              हररओम मतवारी जी, और श्री राहुल मनलोत्स जी ने इस पूर मामल म मरा साथ
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                                                             े
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              मदया। उन्होंने मुझ न कवल मानमसक ऱूप स सहारा मदया, बमल्क कागज़ों क
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                                                                            े
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              काम म भी मरी मदद की। उनका सहयोग मर मलए अनमोल था। मुझ यह एहसास
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              हुआ मक जीवन म कुछ लोग ऐस होत हैं जो हमार साथ तब खड होत हैं जब सब
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              कुछ हमार मखलार्फ होता है।
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