Page 143 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                      एक कडवा सच और अटूट मवश्वास: जब ईमानदारी की


                                         जीत हुई

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                     जीवन म कुछ पडाव ऐस आत हैं जो हमारी यात्रा की मदशा ही नहीं
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              बदलते, बमल्क हमार भीतर की ताक़त को भी परखते हैं। मेर पेशेवर जीवन में भी
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              एक ऐसा ही दौर आया, मजसने मुझ मनराश भी मकया और मुझ यह एहसास भी
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              मदलाया मक सच्चाई और ईमानदारी का माग भल ही मुमश्कल हो, लेमकन वह
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              हमेशा सही होता है। यह कहानी मेर उस समय की है, जब मुझ अकादममक
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              मडमस्रक्ट प्रोग्राम कोऑमडनेटर (ADPC) क पद स कायषमुि कर मदया गया
              और मुझ एक अनचाही चुनौती का सामना करना पडा।
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                     माचष 2016 की बात है, जब मुझ मजला मशक्षा अमधकारी कायाषलय,
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              देवास में ADPC क पद पर प्रमतमनयुमि ममली। यह मर मलए एक बडी मज़म्मदारी
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                                                            थी, मजसम पूर मजल  े
                                                                     ें
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                                                            क  हाई  स्कूल  और
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                                                            हायर      सेकडरी
                                                            स्कूलों का मनरीक्षण
                                                            करना,  हॉस्टलों  की
                                                            देखरख करना, और
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                                                            मशक्षकों  क  मलए
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              प्रमशक्षण आयोमजत करना शाममल था। यह मेर मलए एक प्रशासमनक पोस्ट थी,
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              जो मर मपछल मशक्षण अनुभव स मबल्कुल अलग थी। मने पूरी लगन, मेहनत
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              और ईमानदारी क साथ इस काम को मकया। उस समय क मजला मशक्षा अमधकारी
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              श्री राजेंि खत्री जी का मुझ पर गहरा मवश्वास था, और उनक साथ-साथ मेर साथी
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